नगर पालिका प्रशासन ने मंगलवार को शहर के मोहल्ला लहारियापुरवा में नजूल की
भूमि पर कच्चे आशियाने बनाकर रह रहे गरीबों पर कहर ढाया। उनके कच्चे
मकानों को तहस-नहस कर दिया। कई घंटे तक गरजी जेसीबी ने गरीबों की बस्ती
उजाड़ दी। इसके बाद नगर पालिका या जिला प्रशासन किसी ने भी ये नहीं सोचा कि
ये गरीब कैसे सर्द रात बिताएंगे।
इससे सैकड़ों गरीब परिवारों ने छोटे-छोटे
बच्चों के साथ खुले आसमान के नीचे ठिठुरते हुए रात बिताई। इसके बाद भोर
होते ही बुधवार को महिलाएं, बच्चे जनप्रतिनिधियों और नेताओं की चौखट पर
न्याय की उम्मीद से पहुंचे लेकिन उन्हें सिर्फ आश्वासन ही मिले। इसके बाद
भड़के प्रभावित परिवारों के लोग कलेक्ट्रेट पहुंच गए। यहां एडीएम कार्यालय
के पास पालिका
के ईओ को देखकर वह भड़क गए। उन्होंने ईओ को गाड़ी से बाहर
खींच लिया और उनके साथ जमकर अभद्रता की। कर्मियों ने उन्हें एडीएम कार्यालय
में बंद कर किसी तरह से बचाया। इसके बाद महिलाएं हंगामा करती रहीं। मौके
पर पहुंची पुलिस ने माहौल शांत कराया।
मंगलवार को नगर पालिका व
स्थानीय प्रशासन ने लहारियापुरवा मोहल्ले में पहुंचकर करीब एक सैकड़ा गरीब
परिवारों के आशियाने जेसीबी मशीन से उजाड़ दिए थे। इस दौरान छोटे बच्चे
सामान निकालने के लिए अधिकारियों के सामने गिड़गिड़ाते रहे। कुछ सामान
निकाला और जो नहीं निकाल सके उसे जेसीबी ने ध्वस्त कर दिया। बता दें कि इस
दौरान
प्रशासन ने बिना नोटिस दिए ही गरीबों के घर नजूल की भूमि में होने की
बात कहकर गिरा दिए। ये भी नहीं सोचा गया कि बेघर हुए लोग सर्दी के मौसम
में कहां रात गुजारेंगे। नतीजतन गरीबों को सर्द रात खुले में ठिठुरते हुए
गुजारनी पड़ी। सबसे ज्यादा परेशानी महिलाओं, बच्चों व नवजातों को हुई। सुबह
होते ही पीड़ित परिवार नगर पालिका की कार्रवाई के
खिलाफ जनप्रतिनिधियों से
मांग करने उनके घरों पर पहुंच गए। सबसे पहले पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी
के यहां और फिर सदर विधायक दयाशंकर वर्मा के पास भी गुहार लगाने पहुंचे।
दोनों जगह आश्वासन भर मिले। हालांकि प्रशासन से बात भी की गई, पर कोई ठोस
नतीजा नहीं निकल सका। आखिर में ये सभी आला अफसरों से अपनी बात कहने
कलेक्ट्रेट पहुंचे।
जब वह एडीएम कार्यालय के सामने पहुंचे तभी नगर पालिका
के अधिशाषी अधिकारी रविंद्र कुमार वर्मा को देख लिया। फिर क्या था, महिलाओं
ने नारेबाजी करते हुए ईओ को गाड़ी से बाहर खींच लिया और उनके साथ अभद्रता
की। इस दौरान गाड़ी चालक समेत एडीएम कार्यालय के कर्मचारियों ने बीच बचाव
किया और ईओ को एडीएम कार्यालय में ले जाकर बंद कर
दिया। इसके बाद पीड़ित
महिलाओं ने कार्यालय के बाहर खूब हंगामा काटा। वहां रखीं कुसियां तोड़ दीं
और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की। महिलाओं ने पालिका ईओ पर अभद्र भाषा का
प्रयोग करने का आरोप लगाया है। बवाल की सूचना पाकर पुलिस मौके पर पहुंच गई
और उनके मशक्कत के बाद मामला शांत कराया।
30 साल से कर रहे मजदूरी, पाल रहे बच्चों का पेट
लहारियापुरवा
में कच्चा मकान बनाकर रह रहे अरविंद कुमार पालिका की कार्रवाई से बेहद
दुखी है। वह उजड़े हुए घर को देखकर फफक पड़ते हैं। हमीरपुर जनपद के मंगरौल
गांव निवासी अरविंद वर्ष 1986 में उरई आ गए थे और यहां पर मेहनत
मजदूरी
करके परिवार का भरण पोषण रहे थे। इ1995 में खाली पड़ी जमीन पर कच्ची झोपड़ी
बनाकर रहने लगे थे। इनका कहना है कि नगर पालिका ने न तो कोई नोटिस दिया और
न ही उन्हें कोई आसरा दिया। सख्ती ऐसी दिखाई जिससे सामान भी टूट गया।
ठंड से ठिठुरते रहे बच्चे
कच्चा
मकान पालिका प्रशासन ने ढहा दिया तो वहां पर रह रहे परिवारों को रात खुले
आसमान के नीचे ही बितानी पड़ी। राजेंद्र सिंह और मीना देवी ने कहा कि दो
छोटे बच्चों को सर्द हवाओं के बीच कैसे सुलाया यह तो उनकी आत्मा ही जानती
है। गरीबों पर प्रशासन ने इस तरह का कहर ढाया कि अब हमें सिर ढकने के लिए
जगह भी नहीं बची है। बच्चे ठंड से ठिठुर रहे थे तो आग जलाई और जैसे तैसे
रात गुजारी।
मलबे में तलाशते रहे सामान
आशियाना उजड़ जाने के
बाद बुधवार को बेघर हुए लोग मलबे में दबा सामान निकालने में जुटे रहे। किसी
के रसोई के बर्तन मलबे में दबे हुए थे तो किसी का अन्य सामान। बच्चों से
लेकर बूढ़े बुजुर्ग व महिलाएं तक पूरे दिन सामान ढू़ंढ़ती रहीं। इस दौरान
प्रशासन को भी जमकर कोसा और जो भी उनसे बात करने पहुंचा उसे भी नहीं बख्शा।
महेश दीप, लाल सिंह, प्रकाश, सर्वेश कुमार, समेत कई लोग बिखरे सामान को
एकत्रित कर अब नए आशियाने की तलाश में भी जुट गए हैं।
बख्श दिए जाते हैं बड़े लोग!
लहारियापुरवा में जिस बेरहमी से गरीबों के आशियाने ढहा दिए गए उससे
प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल उठने लगे हैं। यह पहला मौका नहीं है, जब
नगर पालिका प्रशासन ने नजूल की भूमि से कब्जा हटवाया हो। इसके पहले भी
अभियान चले लेकिन ऐसी सख्ती नहीं दिखाई गई। सवाल ये है कि आखिर में दबे
कुचले लोगों पर ही प्रशासन का चाबुक क्यों चलता है?
शहर में ग्रीन लैंड से
लेकर मुख्य मार्गों तक अतिक्रमण किए धन कुबेरों पर सख्ती क्यों नहीं की
जाती। गौरतलब है कि इन दिनों शहर में अतिक्रमण गंभीर समस्या है। ग्रीन लैंड
का अधिकांश हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है। यहां कई आलीशान बिल्डिंग बन
चुकी हैं, पर इनके खिलाफ कार्रवाई नहीं की जाती। समय समय पर इन बिल्डिंगों व
अतिक्रमण को हटाने की
बात ही जाती है। लहारियापुरवा में प्रशासन की सख्ती
के बाद आरोप प्रत्यारोप लगने शुरू हो गए हैं। कहा जा रहा है कि जब गरीबों
पर इतनी सख्ती दिखाई जा सकती है तो धन कुबेरों पर क्यों नहीं?