एट (जालौन)। रेलवे ट्रैक पार कर रहे बुजुर्ग दंपति की ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। सूचना पर पहुंची जीआरपी ने शवों के टुकड़ों को बटोरकर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेजा। इस बीच रोते बिलखते परिजन भी मौके पर पहुंच गए। जीआरपी इंस्पेक्टर बृजमोहन सैनी का कहना है कि जांच की जा रही है।
कोच के मोहल्ला भगत सिंह नगर निवासी हाजी सलीम अब्बासी (70) का कानपुर में टीबी इलाज चल रहा है। बुधवार की सुबह वह पत्नी कुरैशा बेगम उर्फ मुन्नी (65) को साथ लेकर कानपुर इलाज के लिए जा रहे थे। सुबह करीब साढ़े सात बजे के आसपास अब्बासी इंटरसिटी ट्रेन पकड़ने के लिए पत्नी कुरैशा बेगम के साथ एट स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर दो से एक पर ट्रैक के रास्ते आ रहे थे। इस बीच झांसी की ओर से करीब 120 किमी. की रफ्तार से आ रही लोकमान्य तिलक टर्मिनल ट्रेन की चपेट में दंपति आ गए। ट्रेन गुजरने के बाद स्टेशन पर मौजूद यात्रियों को उनके शवों के लोथड़े कई मीटर दूर तक बिखरे पड़े मिले। स्टेशन पर चीख पुकार मच गई। सूचना पाकर जीआरपी और रेलवे के अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। कुछ ही देर में सलीम अब्बासी के बेटे फहीम और वसीम भी इलाकाई लोगों के साथ एट स्टेशन पर पहुंच गए। जीआरपी ने शवों के टुकड़ों को समेट कर उन्हें पोस्टमार्टम के लिए भेजा। बेटे फहीम ने बताया कि पिता का इलाज पहले झांसी में चल रहा था। क्योंकि कानपुर में भी उसके दो भाई है, इनमें से एक समीम आपे चलता है और दूसरा सलमान मजदूरी करता है। बेटों से मिलने और इलाज कराने के लिए कानपुर मां के साथ जा रहे थे। परिजनों के मुताबिक अब्बासी के 6 बेटे और दो बेटियां हैं।
अब्बासी को बचाने में कुरैशा ने गंवाई जान
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक जिस वक्त दोनों पति पत्नी ट्रैक पार कर रहे थे तो कुरैशा आगे थी और अब्बासी पीछे रह गए थे, तभी सामने से ट्रेन को आता देख, चीखती हुई कुरैशा पीछे अपने पति को ट्रैक से खींचने के लिए लौटी और फिर दोनों ही ट्रेन की चपेट में आ गए।
12 साल पहले हुए थे बैंक से रिटायर्ड
अब्बासी के बेटों ने बताया कि पिता एसबीआई कोच में चपरासी के पद से 2007 में रिटायर्ड हुए थे। वे काफी धार्मिक प्रवृत्ति के थे, यही वजह है कि 2009 में मां कुरैशा को लेकर हज भी कर आए थे। माता पिता दोनों काफी सरल स्वभाव के थे।
- लोथड़े व सामान समेटते रो पड़े पुलिस कर्मी
हादसे के बाद जब रेल पुलिस कर्मी ट्रैक से अब्बासी और कुरैशा के शवों के लोथड़े व उनका बिखरा सामान कपड़े, बक्सा, जूते चप्पल समेट रहे थे तो उनकी आंखें भी आंसुओं से नम हो गई। कहना था कि इतना दर्दनाक हादसा पहले कभी नहीं देखा।
- चौकी न थाना, यात्री करते हैं मनमानी
एट स्टेशन पर न तो कोई पुलिस की चौकी है और न ही थाना। जिस कारण यात्री अपनी मनमानी किया करते हैं। पैदल पुल होने के बाद भी सैकड़ों लोग रोजाना ट्रैक पार किया करते हैं। पूर्व प्रधान लालजी ने स्टेशन पर कम से कम एक चौकी खोले जाने की मांग की है।
- पूरी हुई साथ जीने मरने की कसम
बेटों ने बताया कि माता पिता अक्सर बातें किया करते थे, पहले कौन दुनिया से विदा होगा। किसी को क्या पता था कि जीवन भर एक दूसरे का साथ निभाने वाले दोनों एक साथ मौत को भी गले लगाएंगे। बेटों के मुताबिक उनका तो एक पल में ही सब कुछ मानो छिन गया हो।
नीरज