उरई। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना में माताओं को योजना का लाभ दिलाने में लापरवाही को लेकर सीएमओ डॉ. एनडी शर्मा ने सख्ती बरती है। उन्होंने योजना में लापरवाही बरत रहे ब्लॉकों के चिकित्साधिकारियों को चेतावनी जारी की। कहा कि तत्काल काम में सुधार कर लाभार्थियों को शत प्रतिशत लाभ दिलाया जाए। चेतावनी का असर भी हुआ। जिले की रैकिंग में सुधार हुआ है। अब जिला बुंदेलखंड में अव्वल हो गया और प्रदेश में 11 वीं रैंक हो गई है। 10,470 लक्ष्य के सापेक्ष 6,313 का पंजीकरण हो चुका है।
पीएम मातृ वंदना योजना में फरवरी माह की पहली तारीख में जालौन जिले शीर्ष 20 में भी शामिल नहीं था। जिले की रैंकिंग 21 वीं थी। करीब दो हजार प्रसूताओं के खाते में योजना के अंतर्गत दी जाने वाली धनराशि का पैसा नहीं पहुंचा था। इस समस्या को अमर उजाला ने तीन फरवरी के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया था। हालांकि इस योजना के जुड़े अधिकारी दावा कर रहे थे कि योजना के पहले चरण का पोर्टल बंद हो गया है और अब दूसरा चरण शुरू हो गया है।
दूसरे चरण में पोर्टल अप्रैल से सितंबर तक बंद रहा। इसकी वजह से आवेदन लंबित हो गए थे। अब सुधार हुआ है। आशा कार्यकर्ताओं के माध्यम से आवेदन भरे जा रहे हैं। वहीं, योजना में लेटलतीफी के कारण कई प्रसूताओं को आवेदन के बाद भी उनके खाते में भुगतान नहीं हो रहा था। ऐसे मामलों की शिकायत आईजीआरएस पोर्टल पर दर्ज कराई गई थी। इस समस्या को भी अमर उजाला ने चार फरवरी के अंक में प्रकाशित किया था। इसे सीएमओ ने संज्ञान में लिया है और सभी चिकित्साधिकारियों को चेतावनी दी है कि वह तत्काल सभी आशाओं के माध्यम से ज्यादा से ज्यादा लाभार्थियों के आवेदन कराकर योजना का लाभ दिलाना सुनिश्चित करें।
छह चिकित्साधिकारियों को फटकार का दिखा असर
रामपुरा, छिरिया सलेमपुर, माधौगढ़, पिंडारी, नदीगांव के चिकित्साधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि उनके क्षेत्र के आवेदनों की स्थिति ठीक नहीं है। इसमें जल्द सुधार किया जाए। सीएमओ के निर्देश पर काम में तेजी आई है। जिले की रैकिंग में भी सुधार हुआ है। जिले की रैकिंग 21 से 11 वीं तक पहुंच गई है। सीएमओ ने सभी चिकित्साधिकारियों से कहा कि वह अपने क्षेत्र की आशा वर्करों को बुलाकर उनकी पोर्टल संबंधी समस्याओं को दूर करें और उन्हें ज्यादा से ज्यादा आवेदन कराने के लिए प्रेरित करें।
डीबीटी न होने के कारण लटका भुगतान
1640 लाभार्थियों के आवेदन में उनके बैंक खातों में डायरेक्ट बेनीफिट ट्रांसफर (डीबीटी) सुविधा न होने के कारण लटक गया है। जिला कार्यक्रम समन्वयक अभिषेक मिश्रा का कहना है कि ऐसे लाभार्थियों को आशा वर्करों के माध्यम से सूचित किया जा रहा है कि डीबीटी संबंधी समस्या को दुरुस्त करा लें। यही नहीं वह योजना का लाभ पाने के लिए पोस्ट आफिस में संचलित इंडियन पोस्ट पेमेंट बैंक में अपना नया एवं निशुल्क डीबीटी अकाउंट भी खोल सकते है, ताकि उन्हें योजना का लाभ मिल सकें। शासन ने लाभार्थियों को योजनागत लाभ दिलाने के लिए पोस्ट पेमेंट बैंक के शाखा प्रबंधकों को निशुल्क डीबीटी ख़ाता खोलने के लिए पत्र भी लिखा है।
आधार लिंक खाते में ही पहुंचता है भुगतान
अभिषेक ने बताया कि इस योजना में पहली बार गर्भवती होने पर दो किश्तों में पांच हजार रुपये मिलते है। जबकि दूसरी बार प्रसव के बाद बेटी के जन्म पर छह हजार रुपये एकमुश्त दिया जाता है। कुल 11 हजार रुपये का भुगतान होता है। इसमें डीबीटी के जरिये भुगतान होता है। जो आधार लिंक खाते में ही पहुंचता है।
वर्जन
योजना के लाभार्थियों को योजना का लाभ दिलाने के लिए ब्लॉक स्तर पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है। जो 15 फरवरी तक चलेगा। आशा और संगिनी को निर्देशित किया गया है कि वह अपने ब्ल़ॉक की शत प्रतिशत लाभार्थियों को योजना का लाभ दिलाए। चिकित्साधिकारी और बीसीपीएम इसकी निगरानी करें। -डॉ. एनडी शर्मा, सीएमओ