उरई। कुठौंद ब्लॉक के प्राथमिक विद्यालय डगरु का पुरवा में प्रधानाध्यापक डॉ. कमलेंद्र कुमार शिक्षण में नए प्रयोगों के लिए चर्चित हैं। वह गणित के शिक्षक हैं, लेकिन उन्हें पुस्तकों के हिंदी रुपांतरण के लिए जाना जाता है। इसमें गणित मेला प्रमुख पुस्तक है।
उनकी रचनाएं देश-विदेश की विभिन्न पत्र पत्रिकाओं जैसे हम हिंदुस्तानी (अमेरिका), विज्ञान प्रगति, बाल भारती, बाल वाणी, बाल किलकारी ,बाल प्रभात, साहित्य अमृत, फिरकी बच्चों की (एनसीईआरटी की अर्धवार्षिक पत्रिका), प्राथमिक शिक्षक की त्रैमासिक पत्रिका, पंजाब सरकार की मासिक पत्रिका पंजाब सौरभ, माध्यमिक शिक्षा विभाग हरियाणा की मासिक पत्रिका शिक्षा सारथी आदि में प्रकाशित होती रहती हैं।
डॉ. कमलेंद्र को उत्कृष्ट लेखन के लिए साहित्यिक, सामाजिक संगठनों ने सम्मानित किया है। फरवरी 2025 में साहित्य मंडल नाथद्वारा राजस्थान ने उन्हें बाल साहित्य भूषण की मानद उपाधि से सम्मानित किया है। हर रविवार इनकी बाल पहेलियां मिशन शिक्षण संवाद के बोर्ड में लगातार जून 2023 से आ रहीं, इसके लिए मिशन शिक्षण संवाद ने उन्हें शिक्षक रत्न सम्मान से नवाजा है। अप्रैल माह में एनसीईआरटी नई दिल्ली ने उन्हें गणित पाठ्य पुस्तक गणित मेला कक्षा 4 के निर्माण के लिए हिंदी अनुवाद के रूप में आमंत्रण दिया था।
इनके द्वारा अनूदित की गई गणित मेला कक्षा चार पाठ्य पुस्तक देश के प्रत्येक विद्यालय में पहुंचने वाली है। उनकी रचनाएं कई राज्यों के विद्यार्थियों को पढ़ाई जा रही हैं। वह बताते हैं कि वह गणित को पहेलियों के रूप में पढ़ाते हैं। उनकी यह पढ़ाई चर्चित है। उनकी गणित की पहेलियां कई किताबों में भी प्रकाशित हो चुकी हैं।
दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला में भाग लेने जाएंगे श्यामसुंदर
उरई। कालपी के मोहल्ला रावगंज निवासी श्याम सुंदर श्रीवास्तव ’कोमल’ अशोक उच्चतर माध्यमिक विद्यालय लहार में हिंदी व्याख्याता के हैं। उनका चयन दिल्ली में होने वाली दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला के लिए हुआ है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद, (एनसीईआरटी) नई दिल्ली द्वारा भाषा व शिक्षा के क्षेत्र में हिंदी को प्रोत्साहित करने के लिए एक कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। इसमें देश के विभिन्न प्रांतों के 70 शिक्षकों का चयन हुआ है। इसमें उनका नाम शामिल है, वह 25 एवं 26 सितंबर को हिंदी पखवाड़ा : डिजिटल शिक्षा ने हिंदी भाषा एवं साहित्य विषय पर दो दिवसीय कार्यशाला में सहभागिता के लिए वह दिल्ली जाएंगे।
श्याम सुंदर श्रीवास्तव ’कोमल’ लगभग 35 वर्षों से हिंदी की सेवा में लगे हैं। उन्हें हिंदी के प्रति निष्ठा, नवाचार एवं उत्कृष्ट हिंदी लेखन के लिए कई सरकारी, गैर सरकारी, साहित्यिक, सामाजिक संस्थाओं, समितियों व संगठनों ने सम्मानित किया है। उन्होंने हम भारत की शान बनेंगे, प्यारे बच्चे प्यारे गीत, आलोक शिशुगीत भाग 2 आदि उत्कृष्ट कृतियां लिखकर साहित्य जगत को समृद्धि प्रदान की है।
फोटो-5-डॉ.कमलेंद्र कुमार। स्रोत-स्वयं