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Jalaun News: डॉक्टरों को दोषी माना, लेकिन कार्रवाई के नाम पर दी राहत

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उरई। सड़क हादसे में घायल युवक के मेडिकल कॉलेज में पांच घंटे तक तड़पने के बाद दम तोड़ने के मामले में मेडिकल कॉलेज प्राचार्य अरविंद त्रिवेदी ने डॉ. सुधांशु शर्मा व डॉ. सुधीर अग्रवाल को लापरवाही बरतने का दोषी तो माना है। फिर भी कार्रवाई के नाम पर उल्टा उन्हें राहत पहुंचा दी। कार्रवाई के नाम पर डॉक्टरों की ड्यूटी इमरजेंसी से हटाकर सीएमएस कार्यालय में लगा दी गई है। ऐसे में उनपर पड़ने वाला काम का बोझ और कम होने से उन्हें राहत मिलती नजर आ रही है। वहीं, प्रकरण को डीएम ने भी संज्ञान लेते हुए एडीएम की अगुवाई में जांच कमेटी गठित की है। अब देखना होगा कि यह जांच कमेटी दोषियों पर क्या कार्रवाई करती है।
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सिरसाकलार थाना क्षेत्र के दमरास गांव निवासी पूर्व सैनिक सत्येंद्र सिंह (56) कई सालों से परिवार के साथ मोहल्ला बघौरा बाईपास में रहते हैं। उनके साले माधव सिंह के बेटे की शादी मई में है। इस पर वह पुत्र पवन सिंह (27), झांसी के कुडरी गांव निवासी ससुर अजान सिंह परिहार (70), साले माधव सिंह (45) व उसकी पत्नी दीपा व झांसी निवासी साली अहिल्या (35) के साथ सोमवार को बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे से होते हुए नवादा जा रहे थे। कार पवन चला रहा था। हमीरपुर के जरिया थाना क्षेत्र में कार ट्रक से टकरा गई थी। पुलिस ने सभी को कार से निकलवाकर मेडिकल काॅलेज पहुंचाया था, जहां इलाज पांच घंटे तक इलाज न मिलने से पवन की मौत हो गई थी।
परिजनों ने आरोप लगाया था कि पांच घंटे तक पवन स्ट्रेचर पर दर्द से कराहता रहा था, लेकिन उसका उपचार शुरू नहीं किया गया, जिससे उसकी जान चली गई। आरोप है कि जब उन्होंने वहां मौजूद डॉक्टरों से गुहार लगाई तो उल्टा परिजनों से अभद्रता की। मामला तूल पकड़ता देख प्राचार्य अरविंद त्रिवेदी ने इसकी जांच करवाई। दोनों डॉक्टरों को दोषी पाया, लेकिन कार्रवाई के नाम पर उन्हें सिर्फ इमरजेंसी से हटा दिया। अब परिजन आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। इस पर बुधवार को डीएम राजेश कुमार पांडेय ने जांच कमेटी गठित कर दी है। परिजनों को निष्पक्ष जांच व दोषियों पर कार्रवाई की आस जगी है।
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कोट:::
इमरजेंसी में ड्यूटी करने वाले दोनों डॉक्टरों को दोषी पाते हुए उन्हें वहां से हटाकर सीएमएस कार्यालय से अटैच किया गया है। साथ ही अभी भी विभागीय जांच चल रही है। जांच पूरी होने पर कार्रवाई की जाएगी।
- अरविंद त्रिवेदी, प्राचार्य मेडिकल कॉलेज
वर्जन

मामले में एडीएम की अगुवाई में दो सदस्यीय टीम गठित कर दी गई है। पूरे मामले को लेकर गंभीरता से जांच कराई जाएगी, जो भी दोषी पाया जाएगा। उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
- राजेश कुमार पांडेय, डीएम



समय से इलाज मिलता तो जिंदा होता भतीजा
मृतक के चाचा प्रवेंद्र व पंकज ने बताया कि उस दिन उनके भतीजे को अगर समय पर सही इलाज मिल जाता तो शायद वह आज जिंदा होता। लापरवाही के चलते ही उनके भतीजे की मौत हुई है। वह अभी परिजनों का इलाज करा रहे हैं।
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