जिले में जिला पंचायत उपचुनाव के लिए नामांकन वापस लेने की आखिरी तारीख भी बीत गई। इस दौरान चार प्रत्याशियों में से किसी ने पर्चा वापस नहीं लिया। ऐसे में सपा के ही दो दिग्गज आमने सामने हैं। बीजेपी भी मैदान में आ डटी है। निर्दलीय प्रत्याशी सुमन निरंजन गुट भी 29 तारीख को होने वाले चुनावों की तैयारी में जुट गया है। ऐसे में पूरा चुनाव रोचक
दौर में है। शुक्रवार को जिला पंचायत अध्यक्ष पद के लिए नाम वापसी का आखिरी दिन होने से प्रशासन की ओर से कलक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा के तगड़े इंतजाम किए गए। सुबह 11 बजे से दोपहर तीन बजे तक एक भी प्रत्याशी ने नाम वापस नहीं लिया। इस दौरान निर्वाचन अधिकारी संदीप कौर, सहायक निर्वाचन अधिकारी आनंद कुमार पूरे समय कक्ष में मौजूद रहे।
ऐसे में संध्या यादव, सुमन निरंजन, अर्चना गौतम व आशना खातून अध्यक्ष पद के लिए एक दूसरे को टक्कर देते नजर आएंगी। बताते चलें कि गुरुवार को गरौठा विधायाक दीपनरायण यादव, जिलाध्यक्ष इंद्रजीत सिंह यादव सपा के बड़े नेताओं के साथ पूरे दिन और फिर रात में रूठे चल रहे सुरेंद्र मौखरी को मनाने का प्रयास करते रहे। आखिर तक उनका
प्रयास सफल नहीं हो सका। सुरेंद्र मौखरी के सहयोगी सुदामा दीक्षित से भी बातचीत का दौर चला पर कोई नतीजा नहीं निकलता दिखा। सूत्रों की मानें तो सांसद धमेंद्र यादव के साले पुष्पेंद्र यादव (ममना) भी सुरेंद्र की मान मनौव्वल के लिए आए लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। यही वजह है कि नाम वापसी कर चुनाव में मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की सपा की
रणनीति पूरी तरह फ्लाप हो गई। उधर, दिन भर संध्या मौखरी चर्चा का प्रमुख केंद्र रहीं। सपा एवं अन्य राजनीतिक दलों के लोगों में चर्चा थी कि शायद बंद कमरे में सपा नेताओं से कोई समझौता हो गया हो और सुरेंद्र मौखरी अपनी पत्नी संध्या को चुनाव मैदान से अलग कर लें। इन सब कयासों पर उस समय लगाम लग गई जब आखिर तक संध्या ने नाम वापस नहीं लिया।