महानिदेशक परिवार कल्याण डॉक्टर रेनू जलोटा मंगलवार की दोपहर जिला महिला अस्पताल पहुंचीं तो एक-एक करके व्यवस्थाओं की पोल खुल गई। अस्पताल में भर्ती मरीजों और तीमारदारों ने कुछ डॉक्टर व स्टाफ नर्सों की शिकायतें कर दी। बताया कि डॉक्टर व नर्सें प्रसव के लिए आने वाली महिलाओं व उनके तीमारदारों के साथ अभद्रता करतीं हैं।
सुविधा शुल्क भी मांगा जाती है। इस पर महानिदेशक का पारा चढ़ गया। उन्होंने लेबर रूम में किसी भी डॉक्टर या स्टाफ नर्स की नियमित ड्यूटी न लगाने का फरमान सुना दिया। कहा कि डॉक्टरों व स्टाफ नर्सों की ड्यूटी में हर माह परिवर्तन किया जाए। जिन नर्सों की शिकायतें आ रही हैं उन्हें लेबर रूम से हटा दिया जाए। रोस्टर के मुताबिक ही डॉक्टर तैनात किए जाएं।
बोर्ड में लिखे जाएंगे अधिकारियों के नंबर
महानिदेशक ने सीएमएस डॉ. सुनीता बनौधा को निर्देश दिए कि अस्पताल की ओपीडी, इमरजेंसी व लेबर रूम में एक-एक बोर्ड लगाया जाए। इसमें लिखा जाए कि कोई भी व्यक्ति किसी डॉक्टर या नर्स को सुविधा शुल्क न दे।
इसके साथ ही बोर्ड में सीएमएस, सीएमओ व उपनिदेशक स्वास्थ्य के मोबाइल नंबर भी लिखे जाएं। ताकि अगर कोई सुविधा शुल्क मांगे तो इसकी सूचना अधिकारियों को दी जा सके। उक्त बोर्ड एक सप्ताह में लगवाएं।
इसके बाद महानिदेशक रेनू जलौट सीएमओ आशाराम के साथ कालपी सीएचसी पहुंचीं। उन्होंने एक्सरे रूम के टेक्नीशियन संजय दीक्षित से वहां की जानकारी ली। वाह्य रोगी विभाग में कार्यरत विनय पांडे के कक्ष में पहुंचकर बाहर से दवाएं न लिखने की चेतावनी दी।
उन्होंने स्टाक रूम में दवाओं के स्टाक की हालत भी देखी। चिकित्सा अधीक्षक मुलायम सिंह राजपूत को निर्देश दिए कि दवाओं की कमी न होने पाए। टीकाकरण कक्ष में पहुंचकर महिला कर्मियों विमला प्रनामी से इस वर्ष के टीकाकरण अभियान के संबंध में जानकारी ली। कहा कि विभागीय कार्यों में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने दवा वितरण कक्ष का भी निरीक्षण किया।