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हाथ के बने देसी विदेशी पंखों की प्रदर्शनी लगी

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उरई। चूड़ी वाली गली स्थित डॉ हरीमोहन पुरवार के आवास पर हाथ पंखा प्रदर्शनी आयोजित हुई। इसमें देसी-विदेशीा पंखों की प्रदर्शनी लगी। इसमें फिजी, जापान, चीन, थाईलैंड, कंबोडिया आदि देशों के हाथ पंखों के साथ-साथ अपने देश के राजस्थान, तमिलनाडु, केरल, बंगाल, आसाम, त्रिपुरा, मध्यप्रदेश, गुजरात, दिल्ली आदि प्रदेशों के पंखे प्रदर्शित किए गए। प्रदर्शनी का मुख्य आकर्षण श्री गणेश पंखे रहे।
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एडीएम प्रमिल कुमार सिंह ने लगी हाथ पंखा प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि पुरवार दंपति ने कोरोना काल का सदुपयोग किया है। इतने सुंदर हाथ पंखों का संग्रह बगैर एक दूसरे के आपसी सहयोग के संभव नहीं है। नगर मजिस्ट्रेट सुनील कुमार शुक्ला ने कहा कि दुर्लभ हाथ पंखों का संग्रह देखकर बहुत अच्छा लगा। डीआईओएस भगवत पटेल ने कहा कि पुरवार दंपति का यह पंखा संग्रह विरासत के संरक्षण में उपयोगी है। हाथ पंखों की संग्राहक संध्या पुरवार व डॉ हरीमोहन पुरवार ने बताया कि हाथ पंखों का इतिहास लगभग 4000 वर्ष पुराना है। इनका प्रारंभ मिस्र देश से हुआ था। जहां पर पंखे धार्मिक आयोजनों में प्रयोग होते थे। अपने देश में इन पंखों का उपयोग मंदिरों व राजदरबारों में होता था। प्रदर्शनी में प्रदर्शनी में प्रियंका अग्रवाल, राहुल पाटकार, छोटू आदि का विशेष योगदान रहा।
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