फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

ज्यादातर बैंकों में नहीं आई करेंसी, लोग मायूस

Tue, 29 Nov 2016 11:12 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
विज्ञापन
इलाहाबाद बैंक मेें जमा व निकासी के लिए लाइन में लगे खातेधारक। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
नोटबंदी के 21वें दिन भी व्यवस्था पटरी पर नहीं आ पाई है। अधिकतर बैंकों में पैसे न होने से लोगों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। लोग सुबह से ही लाइन लगाकर खड़े रहे। बाद में बैंक कर्मियों द्वारा पैसे न आने की बात कहने पर उन्हें मायूस होकर लौटना पड़ा। इसी तरह शहर के अधिकतर एटीएम मंगलवार को भी बंद रहे। बैंक अधिकारियों के अनुसार अभी
विज्ञापन


आरबीआई की ओर से पर्याप्त मात्रा में रुपये नहीं आ पा रहे हैं जिसके चलते एटीएम को लोड करने में दिक्कत आ रही है।    गौरतलब है कि 500 व 1000 के नोटों के बंद होने के बाद बाजार से लेकर आम आदमी तक सभी परेशान हैं। लोगों को बैंकों से पैसे न मिलने से उन्हें रोजमर्रा की जरूरतों का सामान खरीदनें में भी परेशानी हो रही है। लोग अपनी जरूरत में

कटौती कर किसी तरह परिवार चला रहे हैं। मंगलवार को रोज की ही तरह लोग बैंकों के बाहर लाइन लगाकर खड़े हो गए। इस दौरान अधिकतर बैंकों में उन्हें पैसे न होने के बाबत जानकारी दी गई जिसके चलते उन्हें मायूस होकर लाटना पड़ा।   जालौन प्रतिनिधि के अनुसार सोमवार को अधिकांश बैंकों में कैश न होने से लोगों को मायूस लौटना पड़ा था। वहीं,
विज्ञापन


मंगलवार को बैंकों में कैश आ जाने से बैंकों के बाहर भारी भीड़ जमा हुई। लोगों को घंटों बैंक के बाहर लाइन में खड़ा रहना पड़ा। हालांकि  लोगों को उनकी जरूरत के अनुसार रुपये नहीं मिल सके। किसी बैंक में 2 हजार रुपये प्रति व्यक्ति तो किसी बैंक में 4 हजार रुपये की निकासी की गई। जरूरत के अनुरूप रुपये न मिलने पर लोगों को मायूसी भी हाथ लगी। यही हाल

नगर में लगे विभिन्न बैंकों के एटीएम का भी रहा। स्टेट बैंक में लगे एटीएम से रुपये निकालने के लिए लोगों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ा। वहीं, कुछ बैंकों के एटीएम अभी चालू न होने से लोगों को परेशानियां उठानी पड़ीं। इसके अलावा सभी बैंकों में पूरे दिन रुपयों को जमा किया गया।

रजिस्ट्री आफिस में कम हुई रजिस्ट्री
500 व 1000 के नोट बंद होने का असर रजिस्ट्री ऑफि स में भी देखने को मिला। नोटबंदी से पूर्व जहां प्रतिदिन लगभग 5 से 7 तक रजिस्ट्री होती थीं। वहीं, नोटबंदी के बाद यह संख्या घटकर प्रतिदन मात्र एक या दो रजिस्ट्री ही रह गई है। इसके चलते स्टांप वेंडर सहित दस्तावेज लेखकों आदि पर भी रोजगार का संकट मंडरा रहा है। सब रजिस्ट्रार हरपाल वर्मा ने

बताया कि बड़े नोट बंद होने का असर रजिस्ट्री ऑफि स में भी दिख रहा है। नोटबंदी से पूर्व तक प्रतिदिन 5 से 7 तक रजिस्ट्रियां होती थीं। , नोटबंदी के बाद यह संख्या घटकर प्रतिदिन मात्र एक या दो रजिस्ट्री तक सिमट गई है। इसमें भी बड़ी धनराशि की रजिस्ट्री नहीं हो रही है। लोग छोटी मोटी धनराशि की ही रजिस्ट्रियां करा रहे हैं। उन्होंने बताया हालांकि रजिस्ट्री

फ ीस के रूप में आफि स में अभी 500 के नोट लिए जा रहे हैं। नोटबंदी के कारण रजिस्ट्री कम होने से स्टांप वेंडर व दस्तावेज लेखकों की भी आय नगण्य हो चुकी है। प्रतिदिन एक या दो रजिस्ट्री होने से इन लोगों के सामने रोजगार का संकट हो गया है।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें