उरई। सावन के तीसरे सोमवार को शिवालयों में बम-बम भोले के जयकारे गूंजते रहे। भक्तों ने दूध, दही व गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक किया।
शहर के प्राचीन शिवालयों में मां संकटा मंदिर, महाकालेश्वर, ठंडेश्वरी मंदिर, हुल्की माता मंदिर, बड़ी माता मंदिर, शीतला माता मंदिर, नीलकंठ मंदिर, सिद्धेश्वर महादेव मंदिर, संकट हरण बरगद वाले हनुमान मंदिर सहित अन्य छोटे-बड़े सभी शिवालयों में सुबह से ही भक्तों का आना जाना शुरू हो गया था। भक्तों ने मंदिर में पहुंचकर घी, शहद, पंचामृत, दूध, दही से अभिषेक किया। कई स्थानों पर मिट्टी के शंकर जी बनाकर पूजा-अर्चना की। विधि विधान से भूतभावन भोले नाथ की पूजा अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। पूजा पाठ का क्रम देर रात तक चलता रहा। कई शिवालयों पर शिव भक्तों ने रुद्राभिषेक किया।
दिनभर मंदिरों में दर्शन को लगा रहा तांता
कोंच। महा कालेश्वर मंदिर (नायक का मठ) में महिलाओं की भारी भीड़ रही, उक्त मंदिर में शिव परिवार के साथ भगवान नारायण, आंजनेय हनुमान, एकदंत गणेश, नंदीश्वर और मां दुर्गा की प्रतिमाएं भी प्रतिष्ठित हैं। नई बस्ती के सिद्धेश्वर महादेव मंदिर में भी महिलाओं की भीड़ जलाभिषेक के लिए लगी रही। भगवान मारकंडेयश्वर, बक्शेश्वर, गुप्तेश्वर आदि मंदिरों में देर शाम तक भक्तों का आना जारी रहा।