समाजवादी पार्टी कार्यालय पर मंगलवार को प्रत्याशियों की समीक्षा बैठक में कार्यकर्ताओं की अनुशासनहीनता की भेंट चढ़ गई गई। एक पूर्व जिलाध्यक्ष के पक्ष में हुई नारेबाजी ने माहौल बिगाड़ दिया। जिलाध्यक्ष भी कार्यकर्ताओं को कंट्रोल नहीं कर सके। इस पर पर्यवेक्षक समीक्षा छोड़कर पीछे के गेट से निकल गए। सपा से घोषित प्रत्याशियों के कामकाज
की समीक्षा के लिए पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर जनपद में भेजे गए पर्यवेक्षक एमएलसी बनवारी सिंह यादव व रमेश मिश्रा के सामने यहां की गुटबाजी आ गई। मंगलवार को जब पार्टी कार्यालय में समीक्षा शुरू हुई तो एक-एक कर कार्यकर्ता पेश हुए। इस दौरान कुछ कार्यकर्ता जबरदस्ती अंदर जाने लगे। जिलाध्यक्ष चौधरी धीरेंद्र यादव ने उन्हें रोकना चाहा लेकिन
कार्यकर्ताओं का हुजूम कमरे में जबरन घुस गया। इसके बाद पूर्व जिलाध्यक्ष वीरपाल यादव दादी के समर्थकों ने जमकर नारेबाजी की और जिलाध्यक्ष को निशाने पर रखा। पर्यवेक्षक दल के सदस्यों ने बाहर निकल कर नारेबाजी कर रहे कार्यकर्ताओं को समझाने का प्रयास किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इस पर पर्यवेक्षक कार्यालय से बाहर निकल
गए। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस तरह की अनुशासनहीनता कार्यकर्ताओं के हित में नहीं है। इस दौरान जिलाध्यक्ष कार्यकर्ताओं पर कंट्रोल रखने में फेल साबित हुए। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यवधान डालने ही आया हो तो कोई क्या कर सकता है। पूर्व मंत्री श्रीराम पाल, इंद्रजीत सिंह यादव, पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी, सदर विधायक दयाशंकर वर्मा,
कालपी से प्रत्याशी विष्णुपाल सिंह, माधौगढ़ से लाखन सिंह कुशवाहा, एमएलसी प्रतिनिधि आरपी निरंजन, दीपराज गुर्जर, जिला उपाध्यक्ष सुदामा दीक्षित, विजय सिंह कुशवाहा, अब्दुल समद खां, उमा जखौली, सुरेंद्र मौखरी, पूर्व जिलाध्यक्ष वीरपाल सिंह यादव आदि मौजूद रहे। बता दें कि जालौन से पहले सोमवार को पर्यवेक्षक दल झांसी पहुंचा था। यहां सपा
के दो गुट आमने सामने आ गए थे। पर्यवेक्षकों के सामने मारपीट हुई थी। मामला कोतवाली तक पहुंचा था। मंगलवार को जालौन में भी सपा का एक गुट माहौल को बिगाड़ने आगे आ गया। दूसरा गुट नरम रहा जिससे झांसी जैसे हालात तो नहीं बने लेकिन पर्यवेक्षक को समीक्षा बैठक छोड़कर जाना पड़ा। पर्यवेक्षक यहां से निकल कर कालपी पहुंचे और वहां पर समीक्षा करने लगे लेकिन वहां पर भी हालात यही रहे। पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी और पूर्व जिलाध्यक्ष व प्रत्याशी चौधरी विष्णुपाल सिंह आमने सामने आ गए।
टोपी वाले कार्यकर्ता कौन थे?
पार्टी कार्यालय में मुलायम सिंह यादव यूथ ब्रिगेड व लोहिया वाहिनी की टोपी लगाए एक दर्जन से अधिक कार्यकर्ता पहुंच गए और जमकर नारेबाजी की। जब पर्यवेक्षक चले गए तो टोपी वाले कार्यकर्ता भी चले गए।लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष इमरान उल्ला ने कहा कि यह कार्यकर्ता उनके नहीं है। यही बात यूध ब्रिगेड के जिलाध्यक्ष दिनेश यादव ने कही। चर्चा का विषय बन गया कि आखिर टोपी वाले कार्यकर्ता कौन थे।
यहां पर कुछ भी अच्छा नहीं - बनवारी
सपा कार्यालय से निकले पर्यवेक्षक ने गाड़ी में बैठे ही अमर उजाला से खास बातचीत में अपना आक्रोश व्यक्त कर दिया। कहा कि यहां पर जो माहौल देखने को मिला उस पर तो यही कहेंगे कि कुछ भी अच्छा नहीं है। कार्यकर्ताओं का जो व्यवहार रहा उसमें अनुशासनहीनता ही सामने आई है। वह पार्टी के निर्देश पर समीक्षा आए थे। प्रत्याशियों की समीक्षा रिपोर्ट
प्रदेश अध्यक्ष को सौंपेगे। बीच में ही बैठक छोड़कर जाने पर उन्होंने कहा कि इस माहौल में समीक्षा कर पाना मुश्किल है। ऐसे कार्यकर्ता कभी आगे नहीं बढ़ सकते। एमएलसी रमेश मिश्रा ने कोई भी प्रतिक्रिया देने से इंकार कर दिया।
कालपी में पूर्व सांसद व प्रत्याशी आए आमने-सामने
पर्यवेक्षक दल कालपी पहुंचा और चौधरी वीरेंद्र सिंह के आवास पर समीक्षा बैठक बुला ली। यहां प्रत्याशी चौधरी विष्णुपाल सिंह ने पार्टी के जिला नेतृत्व पर सवाल उठाए और कहा कि बैठक की सूचना नहीं दी जाती है। इस पर पूर्व सांसद ने सामने आकर इस बात का विरोध किया। समाचार पत्रों की कटिंग दिखाई। दोनो नेताओं में तीखी टिप्पणी भी हुई। माहौल
उस समय गरमा गया जब दो वरिष्ठ नेता पूर्व सांसद घनश्याम अनुरागी व पूर्व जिलाध्यक्ष व कालपी से प्रत्याशी चौधरी विष्णुपाल सिंह गुर्जर आमने सामने आ गए। प्रत्याशी ने जिला नेतृत्व पर मनमाने ढंग से पार्टी चलाने का आरोप लगाते हुए बैठकों की सूचना तक न देने का आरोप लगाया। बस फिर क्या था पूर्व सांसद ने भी मोर्चा संभाला और पर्यवेक्षकों
को बताया कि राह से भटकाने का प्रयास किया जा रहा है। पार्टी की बैटकों की सूचना दी जा रही है। व्हाटसएप ग्रुप से लेकर समाचार पत्रों में सूचना प्रकाशित हुई। पर्यवेक्षकों ने दोनो नेताओं को शांत कराया। इससे पहले भी पूर्व जिलाध्यक्ष सोहराब खान के मैरिज हाल में आयोजित कार्यकर्ता सम्मेलन के मुख्य अतिथि आरके पटेल बांदा के सामने मंच पर भी दोनो नेताओं में टकराव की स्थिति हो गई थी। एक दूसरे को उंगली दिखाई गई थी।