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सात साल की रंजिश में हुई तीसरी हत्या

Sat, 20 May 2017 12:12 AM IST
अमर उजाला जालौन
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रामू काका की मौत से रोती बिलखतीं महिलाएं। - फोटो : अमर उजाला
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जालौन के मोहल्ला भवानीराम मोहल्ले में सभासद रविंद्र सिंह उर्फ रामू काका की हत्या के मामले में आठ लोगों को नामजद किया गया है। हत्या पुरानी रंजिश में की गई है। पुलिस सूत्रों की मानें तो सात साल पहले प्रधान चुनाव से शुरू हुई रंजिश में यह तीसरी हत्या है। एसपी ने आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए तीन टीमें बनाई है। आरोपियों और उनके नाते, रिश्तेदारों के यहां दबिश दी जा रही है।
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गुरुवार शाम जब सभासद रामू काका घर केे बाहर बैठे थे, तभी बाइक से आए तीन बदमाशों ने गोलियां बरसा दी। दो गोली लगने से घायल सभासद की जिला अस्पताल में मौत हो गई थी। पिता लल्लाराम ने आठ लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज कराई है। पिता का कहना है कि जब वे सभासद बेटे रविंद्र उर्फ रामू काका और बहू के साथ घर केे बाहर बैठे थे, तभी दो बाइकों पर आए राम अनुग्रह उर्फ गुड्डू व लक्ष्मण सिंह पुत्र वीरेंद्र सिंह निवासी मोहल्ला फर्दनवीस, यशप्रताप सिंह उर्फ ओमजी पुत्र छोटे राजा निवासी जगनेवा, नारायन सिंह, गजेेंद्र सिंह पुत्र शंकर सिंह निवासी मोहल्ला चौधरयाना आए।

इनके हाथों में तमंचे और रिवाल्वर थे। सबसे पहले लक्ष्मण सिंह ने तमंचे से फायर किया जो रामू काका को लगा। दूसरी गोली नारायन सिंह ने मारी। इसके बाद रामअनुग्रह और प्रताप सिंह ने भी फायरिंग की। शोर मचाने पर हमलावर पूरे परिवार को जान से मारने की धमकी देते हुए फरार हो गए। पिता लल्लाराम ने रामअनुग्रह, लक्ष्मण सिंह, यश प्रताप, नारायन सिंह, गजेंद्र सिंह, बलवंत सिंह व सिमरन सिंह के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज कराया है। पुलिस का कहना है कि आरोपियों की तलाश की जा रही है।
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राजू मास्टर की हत्या से शुरू हुई रंजिश
बताया जाता है कि खूनी रंजिश की शुरुआत 2010 में ग्राम इटहया के प्रधानी चुनाव से हुई थी। प्रधानी का चुनाव लड़ रहे रामू काका के नजदीकी राजू मास्टर की हत्या कर दी गई। उस दौरान उन्हीं लोगों पर आरोप लगे थे, जिन पर सभासद रामू काका की हत्या का आरोप लगा है। बताया जाता है कि वर्ष 2015 में राजू मास्टर के हत्यारोपियों रामअनुग्रह, लक्ष्मण सिंह, नारायन सिंह, गजेंद्र सिंह व बलवंत सिंह सूर्य प्रताप सिंह के भांजे सूर्य प्रताप सिंह की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसमें रामू काका केे अलावा संजीव सिंह, सीताराम, नन्ना, बलवीर आदि नामजद हुए थे। इसी मामले में हाल ही में रामू जेल से छूट कर आए थे। कयास लगाए जा रहे हैं कि भांजे की हत्या का बदला लेने केे लिए रामू काका को गोलियों से भून दिया गया।

सुपारी किलर ने बरसाईं गोलियां
रामू के पिता ने भले ही आठ लोगोें को हत्या में नामजद किया हो, लेकिन हकीकत कुछ और ही है। हमलावर दो बाइकों पर सवार आठ लोग नहीं, बल्कि एक बाइक पर सवार तीन लोग थे। प्रत्यक्षदर्शियों की मानें तो गोलियां चलाने के अंदाज से लग रहा था कि ये भाडे़ के हत्यारे हैं, जो वारदात को अंजाम देकर जिले से बाहर निकल सकते हैं। पुलिस भाडे़ के हत्यारों की भी सूची बना रही है।

पुलिस की चूक से गई जान
जब से रामू काका जेल से छूटे थे, तब से उन्हें अपनी हत्या का डर था। पिता लल्ला का कहना है कि रामू ने पुलिस से मिलकर अपनी हत्या की आशंका जताई थी, लेकिन पुलिस नहीं चेती। आखिर उनके बेटे की जान चली गई।

तीन थानों की पुलिस ने डाला डेरा
खूनी संघर्ष को लेकर पुलिस अब गंभीरता से ले रही है। रामू काका के मकान से लेकर हत्यारों के घरों के बीच तीन थानों की पुलिस डटी है। इनमें सिरसा कलार, रेंढ़र व जालौन कोतवाली पुलिस शामिल है। एसपी के सख्त निर्देश है कि नामजद आरोपियों को हर हाल में जल्द से जल्द पकड़ा जाए। इससे कि गांव में व्याप्त भय का माहौल खत्म हो। वहीं, ग्रामीणों में पुलिस के प्रति रोष है। नजदीक में थाना होने के बाद भी इतनी बड़ी वारदात कैसे हो गई।
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