ललितपुर के मुख्य डाकघर में 12 साल पहले हुए तीन करोड़ के घोटाले के मुख्य आरोपी को पुलिस ने पकड़ लिया। सीओ सिटी संतोष कुमार ने बताया कि आरोपी को सीबीआई के सुपुर्द कर दिया गया है।
कोतवाली में प्रेसवार्ता कर सीओ ने बताया कि करीब 12 साल पहले ललितपुर स्थित मुख्य डाकघर ने के निवेशकों ने आरोप लगाया था कि 14 लोगों ने (जिसमें कुछ विभाग के भी कर्मचारी शामिल थे) उनके एनएससी की करीब तीन करोड़ की धनराशि का घोटाला किया था।
इसका मुख्य आरोपी उरई के राजेंद्र नगर निवासी अवधेश खरे पुत्र छोटे लाल है, जो उस समय डाकघर का मुख्य बाबू भी था। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज की थी। इसके बाद मामले की जांच सीबीआई के सुपुर्द कर दी गई थी। सीओ के मुताबिक अभी तक मामले में चार आरोपी पकड़े जा चुके थे।
मुख्य आरोपी की तलाश चल रही थी, दो दिन पहले सीबीआई विभाग से आए उपनिरीक्षक शशांक और मुख्य आरक्षी विजय द्विवेदी ने अवधेश के जिले में होने की सूचना दी। इसपर पुलिस ने मंगलवार रात अवधेश को उसके घर से गिरफ्तार कर लिया। अवधेश के खिलाफ गैर जमानती वारंट भी जारी हुआ था। फिलहाल उसको सीबीआई टीम के हवाले कर दिया गया।
पुलिस सूत्रों की मानें तो अवधेश के अलावा उसके नाते रिश्तेदारों की संपत्ति की जांच पड़ताल भी की जाएगी। जिससे पता चल सके कि डाकघर में हुए घोटाले की धनराशि का व्यय कहां किया गया है। नौकरी से निकाले जाने के बाद से अवधेश कुछ खास कामकाज कर भी नहीं रहा था। इससे भी पुलिस और सीबीआई का संदेह गहरा हो चला है।
पुलिस ने बताया कि अभी भी मामले में नौ आरोपी फरार चल रहे हैं। इनमें कुछ तत्कालीन विभागीय और गैर विभागीय है। घपले में अवधेश के कुछ साथी भी हो सकते हैं। जिनके तार जिले से भी जुड़े होने की आशंका है। पुलिस उनका भी पता लगाने के लिए मुखबिरों का जाल बिछाएगी।
अवधेश को जैसे ही पुलिस और सीबीआई टीम ने उठाया तो उसके परिजनों ने अवधेश की पैरवी के लिए कई नेताओं से संपर्क किया। लेकिन मामला तीन करोड़ के घोटाले और उस पर सीबीआई जांच चलने को देख किसी भी नेता की हिम्मत पैरवी करने की नहीं हुई।