रामपुरा। रामपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी के नर्स से मारपीट का मामला तूल पकड़ गया है। इस संबंध में स्टाफ नर्स के मुख्य चिकित्सा अधिकारी (सीएमओ) से शिकायत करने के बाद सीएमओ ने इस विषय में जांच के आदेश दे दिए हैं। एक दिन पूर्व रामपुरा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में काम करने वाली संविदा स्टाफ नर्स पूनम विशभनोई ने प्रभारी चिकित्साधिकारी वीर प्रताप सिंह पर मारपीट का आरोप लगाया था। उनका आरोप है कि उन्होंने प्रभारी चिकित्सक से मंगलवार को छुट्टी मांगी जिस पर वह टाल मटोल करने लगे। प्रभारी चिकित्साधिकारी ने कहा कि वह अपनी जगह किसी अन्य नर्स की ड्यूटी लगाकर जाएं। इस पर स्टाफ नर्स ने उनसे कहा कि आप अन्य नर्सों की छुट्टी में खुद ही उनकी ड्यूटी लगा देते हैं जबकि उनके केस में उनपर यह भार डाल रहे हैं।
आरोप है कि इसी बातचीत के दौरान प्रभारी चिकित्साधिकारी ने उन्हें चाटा मार दिया और उनका हाथ जोर से पकड़ कर उन्हें धक्का दे दिया। इससे वे पीछे दीवार से टकरा गईं। दीवार से टकराते ही उनकी आंखाें से खून गिरने लगा और चेहरे पर भी चोट आई। इसके अलावा स्टाफ नर्स की हथेली और घुटनों में भी चोट लगी जिससे वह सूज गए। इस संबंध में प्रभारी चिकित्साधिकारी से भी संपर्क करने की कोशिश की गई पर उनका फोन नहीं उठा। नर्स पूनम विशभनोई ने आरोप लगाया है कि इस मामले को दबाने के लिए प्रभारी चिकित्साधिकारी ने उन्हें धमकी भी दी है। साथ ही कहा कि वे मनमाने ढंग से कभी भी दो दिन का वेतन काट देते हैं। पीड़िता ने सीएमओ को पत्र लिखकर कार्रवाई की मांग की है। पीड़िता के पति ने मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत महिला आयोग और पुलिस के अधिकारियों को भी इस संबंध में शिकायती पत्र भेजा है। मांग की है कि मामले की उच्चस्तरीय जांच कराई जाए और इस आधार पर दोषी प्रभारी चिकित्सक के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए।
स्टाफ नर्स की शिकायत मिली है। इस संबंध में डिप्टी सीएमओ देवेंद्र भिटौरिया को जांच सौंप दी है। जांच के आधार पर ही उचित कार्रवाई की जाएगी। अशोक कुमार, सीएमओ