जिला जेल से आठ जनवरी को तीन बंदी व एक कैदी के फरार होने के मामले में
जेलर और डिप्टी जेलर को निलंबित कर दिया गया। आईजी जेल देवेंद्र सिंह चौहान
ने दोनों जेल अधिकारियों की भूमिका को संदिग्ध मानते हुए यह कार्रवाई की।
उधर पुलिस की स्पेशल टीमों ने तीन फरार बंदियों को शनिवार को गिरफ्तार कर
लिया। चौथा सजायाफ्ता कैदी अभी भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है।
रविवार
को सर्किट हाउस में आईजी जेल देवेंद्र चौहान ने मीडिया से बातचीत में कहा
कि पूरे घटनाक्रम में जेलर यूपी सिंह और डिप्टी जेलर आफताब अंसारी की
भूमिका संदिग्ध है। इसलिए इन्हें निलंबित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि
कैदियों के सरिया काटने, दीवार फांदने और पोल पर चढ़कर भागने के घटनाक्रम
में जेल के कुछ सिपाहियों की भूमिका भी संदिग्ध
है। साथ ही यह जेल प्रशासन
की भारी चूक है। मामले की जांच प्रदेश स्तरीय उच्च समिति कर रही है।
उन्होंने
माना कि जेल में बंदी रक्षकों की भारी कमी है। इसके मद्देनजर जिला जेल में
जल्द अतिरिक्त बंदी रक्षकों की तैनाती की जाएगी। वहीं कोर्ट के आदेश से
यहां सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जाएंगे। आईजी जेल ने कहा कि घटना के बाद अब
उरई
में जेल अधीक्षक की नियुक्ति भी की जाएगी। नए जेलर आनंद शुक्ला को
चार्ज दिया जा चुका है। नए जेल अधीक्षक जल्द अपना कार्यभार ग्रहण कर लेंगे। उधर शनिवार सुबह दो फरार बंदियों को कुकरीगांव में गिरफ्तार करने के
बाद पुलिस की स्पेशल टीमों ने देर रात तीसरे फरार बंदी को औरैया के
दिबियापुर में गिरफ्तार कर लिया। घटना का मास्टर माइंड सजायाफ्ता मुन्ना अब
भी पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ा है। पुलिस ने उस पर 50 हजार का इनाम घोषित कर
दिया है।