रामपुरा में बीडीसी की कथित हत्या के मामले में दोष अब केकड़े पर आ रहा है। पुलिस की कहानी पर यकीन किया जाए तो बीडीसी सदस्य की हत्या नहीं, उसकी मौत डूब कर हुई थी। रही बात उसकी आंख और कान काटे जाने की तो पुलिस को विश्वास है कि वे चाकू से नहीं काटे गए बल्कि इन्हें केकड़ा खा गया। इस सबके पीछे पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला भी दे रही है। इस मामले में अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज है। उधर, परिजन पुलिस के तर्कों को मनगढ़ंत और निराधार बता रहे हैं।
शुक्रवार सुबह छौना गांव के बीडीसी अमर सिंह 58 का शव लिड़ऊपुर नहर में मिला था। उसकी चाकुओं से गोदकर हत्या की बात सामने आई थी। शव की दोनों आंखें और एक कान भी गायब था। पुलिस ने बेटे की तहरीर पर अज्ञात लोगों के खिलाफ हत्या का मामला दर्ज किया था। शुरुआत में पुलिस ने भी हत्या मानते हुए तीन-चार संदिग्धों को उठाकर पूछताछ की और बीडीसी के ससुराल के गांव नाहर भी गई।
अब पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट का हवाला देते हुए कार्रवाई में ढीली पड़ती नजर आ रही है। परिजनों का आरोप है कि नाहर के जिस युवक ने पुल पर खड़ी बाइक बीडीसी के घर तक पहुंचाई पुलिस ने पूछताछ के बाद उसे भी छोड़ दिया। थानाध्यक्ष मिथलेश कुमार का कहना है कि फिलहाल पोस्टमार्टम रिपोर्ट तो यही कह रही है कि अमर की मौत डूबने से हुई है। फिर भी जांच पड़ताल की जा रही है। बता दें कि जब नगर में अमर का शव मिला था, तो कुछ ही दूरी पर स्थित पुल पर उसकी बाइक भी चाबी लगी हुई खड़ी थी।
खड़े हो रहे हैं सवाल
परिजनों का सवाल है कि पुल और नहर की दूरी करीब दो किलोमीटर है। कोई पैदल नहर की ओर क्यों जाएगा। जाएगा भी तो डूबेगा कैसे और इतनी जल्दी केकड़े आंखें कैसे खा लेंगे। पुलिस जरूर कुछ खेल कर रही है। मृतक के शरीर, हाथ-पैर पर भी चाकू के निशान थे।
अफसरों के पास भी नहीं जवाब
मामले की पेचदगी देख अधिकारी भी कुछ नहीं बोल पा रहे हैं। नाम न छापने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने सिर्फ इतना ही कहा कि अभी जांच चल रही है, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट का भी अध्ययन किया जा रहा है। कुछ संदिग्ध हिरासत में भी है। पारिवारिक कलह के चलते मामला आत्महत्या का भी हो सकता है।