उरई में व्यापारी की फायरिंग से दम तोड़ने वाले सिपाही अरविंद के पिता राज बहादुर पोस्टमार्टम पहुंचते ही चीख पड़े आखिर इतना बड़ा कौन सा गुनाह कर दिया था बेटे ने जो उस हत्यारे ने हमें जीवन भर गम दे दिया। वहीं कोने में बैठे अरविंद के बूढ़े बाबा की आंखों के आंसू थे कि थमने का नाम नहीं ले रहे थे।
बाबा के मुताबिक पुलिस उस हत्यारे पर कतई रहम न करें, और उसे जल्द से जल्द सलाखों के पीछे पहुंचाए। मौके पर मौजूद पीएसी के सिपाहियों की आंखों में भी गम और गुस्सा दोनों नजर आ रहा था। साथियों ने बताया कि अरविंद की पत्नी शारदा और मां सावित्री को मौत की सूचना देने की हिम्मत नहीं पड़ रही है।
घर पर अरविंद के दोनों बच्चे ऋषभ (5) और तनिष्का (7) अपने पापा के अस्पताल से घर लौटने का रास्ता देख रहे हैं। परिजनों ने बताया कि अरविंद का एक छोटा भाई देवेंद्र और बहन बीनू भी है। बता दें कि बुधवार की शाम अरविंद को उरई स्थित अंबेडकर चौराहे के पास बाजार में दुकानदार नीलू ने गोली मार दी थी।
दुकानदार की फायरिंग में झांसी के पीएसी सिपाही की मौत और दूसरे सिपाही के घायल होने के मामले में पुलिस कई बिंदुओं पर जांच कर रही है। इस पूरे मामले में पुलिस को यह सवाल मथ रहा है कि आखिर ऐसी क्या बात हुई कि दुकानदार को फायरिंग करनी पड़ी।
इसे लेकर तरह-तरह की चर्चाएं भी हैं। सूत्रों की मानें तो पहले सिपाहियों ने दुकानदार के साथ मारपीट की थी। इसके बाद दोबारा सिपाही उसकी दुकान पर पहुंच गए और दोनों पक्षों में कहासुनी होने के बाद मामला फायरिंग तक पहुंच गया। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि सिपाहियों के अलावा स्कार्पियो में और कौन बैठा था। सिपाहियों के पास कोई शस्त्र था या नहीं।