दहेज में बाइक व पचास हजार रुपये की मांग पूरी न होने पर महिला को ससुरालियाें के साथ मौत के घाट उतारने का दोष सिद्ध हो जाने पर जिला सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार कंसल ने आरोपी पति को सात साल की कैद व आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। इस मामले में ससुर व सास पर दोष सिद्ध न होने पर जज ने उन्हें बरी कर दिया। जालौन कोतवाली के
मुहल्ला कटरा निवासी नसीर ने कदौरा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि उसने अपनी बेटी अफसाना उर्फ जूली का विवाह कदौरा थाना के मुहल्ला धोबीपुरा निवासी यासीन के साथ किया था। हैसियत के मुताबिक दान दहेज भी दिया था लेकिन पति यासीन, ससुर मुन्ना व सास मदीना अतिरिक्त दहेज की मांग को लेकर प्रताड़ित करने लगे। यह बात बेटी ने उसे बताई तो
लोक लाज का वास्ता देकर उसने चुप करा दिया। इस पर 25 मई 2012 को ससुरालियाें ने एक राय होकर बेटी को मौत के घाट उतार दिया। इस मामले में थाना पुलिस ने तीनाें
आरोपियाें के खिलाफकोर्ट में आरोप पत्र दाखिल कर दिया। इसकी सुनवाई जिला सत्र न्यायाधीश प्रदीप कुमार कंसल की अदालत में चल रही थी। मंगलवार को जज ने दोनाें पक्षाें
के अधिवक्ताआें की बहस सुनने के बाद आरोपी पति यासीन पर दोष सिद्ध हो जाने पर सात साल की कैद व आठ हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। शासन की ओर से पैरवी लखनलाल निरंजन ने की।