उरई। भीषण गर्मी में जहां इंसान तेज धूप और उमस से बेहाल है वहीं बेजुबान मवेशियों की हालत कोई देखने वाला ही नहीं है। यूं तो प्रशासन ने अन्ना मवेशियों के लिए गोशालाओं का इंतजाम किया है लेकिन वहां पर उनकी सुविधाओं के इंतजाम का बुरा हाल है। कहीं गोशाला में टीन और तिरपाल नहीं है। जिस कारण मवेशियों को 46 व 47 डिग्री सेल्सियस के तापमान के बीच में धूप में खड़ा होना पड़ रहा है। मवेशी शिकायत भी करें तो किससे उनकी जुबान कौन समझेगा। लिहाजा वे आंखों से अपनी बेबसी जाहिर कर रहे हैं। कुछ गोशालाओं में चारे पानी का भी इंतजाम नहीं है। उन गोशालाओं के आसपास मवेशियों की खाल और उनके अस्थि पंजर पड़े होना गर्मी से उनकी मौतों की ओर इशारा कर रही है।
गेट पर ताला, सुविधाओं का हवाला
ऊमरी। रामपुरा की कान्हा गोशाला का हाल तो और भी खराब है। ग्रामीणों की मानें तो गोशाला के आसपास मवेशियों की खाल और कंकाल बता रहे हैं कि अव्यवस्थाओं का आलम किस हद तक है। टिन शेड के नाम पर साधारण सा टप्पर पड़ा हुआ है। मवेशी धूप से बचने के लिए हाल की दीवार की छाया में खड़े नजर आते हैं। मवेशियों की नाद में गंदा पानी भरा रहता है तो गेट पर अक्सर ताला लटका दिखता है और बहुत कम कर्मचारी भी देखे जाते हैं। रामपुरा की यह गोशाला भी करीब 13 बीघा जमीन पर दो ढाई करोड़ की लागत से बनी है। जिम्मेदारों का कहना है कि अभी गोशाला में निर्माण कार्य चल रहा है।
ग्रामीणों के भरोसे चल रही गोशाला
एट। ग्राम पिरौना में खुली गोशाला में तो अभी तक टिन शेड डाली ही नहीं गई है। लिहाजा सभी मवेशी पूरे दिन तेज धूप में ही खड़े नजर आते हैं। चारे पानी का भी कोई इंतजाम नहीं है, यहां तक कि गेट पर चौकीदार भी नहीं है। गोशाला की पूरी व्यवस्था ग्रामीण ही जैसे तैसे संभाल रहे हैं। सुबह मवेशी गोशाला से छोड़ दिए जाते हैं और शाम होते ही गांव वाले ही उन्हें हांक कर वापस कर जाते हैं। इसके बाद न कोई उन्हें देखने वाला है और न पूछने वाला। ग्रामीणों का कहना है कि छोड़े और बंद न करें तो मवेशी भूख से मर जाएंगे। प्रशासन से तो उन्हें चारा पानी भी नहीं मिलता है।
अजनारा में मवेशी हैं न चारा
आटा। सर्दियों के मौसम में आटा क्षेत्र के किसानों के लिए सिरदर्द बनी अजनारा गोशाला में इस वक्त ताला पड़ा हुआ है। गोशाला का पता करने पर मालूम चला कि न तो मवेशियों के लिए टिन शेड ही है और न चारे पानी का कोई इंतजाम। इस कारण ग्रामीण भी मवेशियों को गोशाला तक नहीं लाते हैं। जिससे गोशाला वीरान सी पड़ी है। बता दें इसी गोशाला के मवेशियों ने बाड़ा तोड़कर आसपास के गांवों के किसानों की कई बीघा फसल सर्दियों में चट कर दी थी। इस वक्त भी गांवों के मवेशी गोशाला के बजाए खेतों पर ही मंडरा रहे हैं। जिस कारण किसानों को एक बार फिर लाठी हाथ में लेनी पड़ रही है।