जालौन। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती होने आए यूपी 100 के सिपाही की अभद्रता से भड़के डॉक्टर और कर्मियों ने काम बंद कर दिया। स्वास्थ्य सेवाओं के बंद होने से यूपी 100 के इंस्पेक्टर उरई से पहुंचे और आरोपित कांस्टेबल के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। तब चिकित्सालय स्टाफ काम पर लौटा।
शुक्रवार सुबह लगभग 11 बजे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉ. कपिलदेव गुप्ता कमरा नंबर 10 में मरीज देख रहे थे। तभी यूपी 100 में सिपाही राजू चौधरी अपना पर्चा लेकर पहुंचे और कहा कि पर्चे पर रात का समय डालकर उन्हें रात में चिकित्सालय में भर्ती दिखा दें। डाक्टर ने बताया कि यह पर्चा दिन की ओपीडी का है। वह बैक डेट में उन्हें भर्ती नहीं दिखा सकते हैं।
आरोप है कि इसी बात पर सिपाही राजू ने उनके साथ अभद्रता कर दी। यह देखकर अस्पताल परिसर में अफरातफरी मच गई। आसपास कमरों में बैैठे डॉक्टर भी मौके पर पहुंच गए। इस पर सिपाही अन्य चिकित्सकों के साथ भी अभद्रता कर मौके से भाग निकला। घटना से नाराज स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी डॉ. मुकेश राजपूत सहित समस्त स्टाफ ने स्वास्थ्य सेवाएं ठप कर दी।
इतना ही नहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रभारी ने घटना की जानकारी सीएमओ व एसपी को दी। इसके बाद प्रशासन हरकत में आ गया। सूचना मिलते ही यूपी 100 के इंस्पेक्टर सौरभ सिंह व एसआई मिथलेश कुमार मौके पर पहुंच गए। जहां उन्होंने डॉक्टरों से बात कर आरोपित कांस्टेबल के खिलाफ कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस पर लगभग 2 बजे ओपीडी सेवा बहाल हुई। इस दौरान डॉ. मुकेश राजपूत, डॉ. अनुपमा, डॉ. कपिलदेव गुप्ता, डॉ. सहन बिहारी गुप्ता, डॉ. योगेश आर्या, राजीव दुबे, फार्मासिस्ट पीएन शर्मा, अवधेश राजपूत, नरेंद्र, हासिम, एके दौंदेरिया आदि स्टाफ मौजूद रहा।जब तक सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के डॉक्टर काम पर नहीं लौटे तब तक लगभग तीन घंटे अस्पताल परिसर में मरीज परेशान रहे।
निरीक्षण में भी गैरहाजिर मिला था सिपाही
जालौन। यूपी 100 के इंस्पेक्टर सौरभ सिंह ने बताया कि गुरुवार की रात कांस्टेबल राजू चौधरी की ड्यूटी यूपी 100 की बाइक में एक होमगार्ड के साथ थी। देर रात लगभग डेढ़ बजे वह यूपी 100 की लोकेशन देख रहे थे। तब राजू की लोकेशन एलआईसी आफिस के पास होनी चाहिए थी लेकिन चेकिंग के दौरान वह वहां नहीं मिला। इसके बाद काफी देर तक वह उसका मोबाइल नंबर भी लगाया गया पर बात नहीं हुई। बाद में पता चला कि कांस्टेबल राजू चौधरी ड्यूटी पर आए ही नहीं हैं। ड्यूटी में अनुपस्थित मिलने पर उसके खिलाफ कार्रवाई के लिए लिखा गया। कार्रवाई से बचने के लिए वह डॉक्टर पर रात में अस्पताल में भर्ती करने का दबाव बना रहा था, ताकि कार्रवाई से बच सके।