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कारागार की सुरक्षा बढ़ी, कैमरों से भी निगरानी

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उरई। यूं तो जनपद की शायद ही कोई ऐसी जेल हो, जहां क्षमता से अधिक कैदी न हो। यही स्थिति जिला कारागार की भी है। बावजूद इसके चित्रकूट जेल में हुई गैंगवार की घटना को देखते हुए जेल प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था और बढ़ा दी है। रोजाना बंदियों की चेकिंग की जा रही है और बैरकों को खंगाला जा रहा है। इसके अलावा सीसीटीवी भी चेक किए जा रहे हैं। वर्तमान में 30 से अधिक कैमरों के माध्यम से जिला कारागार की निगरानी की जा रही है। सुबह- शाम बंदियों की गिनती में भी पूरी सतर्कता बरती जा रही है। जेल प्रशासन का कहना है कि कोरोना काल के चलते मिलने की व्यवस्था पहले से ही बंद है। सुरक्षा व्यवस्था में भी किसी तरह की कोताही नहीं की जा रही है।
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बताते चलें कि जिला कारागार में लगभग 450 बंदियों की क्षमता है। जबकि वर्तमान में 800 से एक हजार के बीच बंदी मौजूद है। ऐसे में कारागार की सुरक्षा को बनाए रखना प्रशासन के लिए कड़ी चुनौती है। जेल अधीक्षक सीताराम शर्मा का कहना है कि जिला कारागार में फिलहाल किसी भी तरह की सुरक्षा में कोताही नहीं की जा रही है। रोजाना बंदियों की चेकिंग और कैमरे भी देखे जा रहे हैं।
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वर्ष 2010 में हुआ था गैंगवार
जनपद का जिला कारागार भी चित्रकूट जैसी घटनाओं के लिए चर्चा में रह चुका है। कुख्यात डकैत और अपराधी कारागार में सजा काट चुके हैं। वर्ष 2010 में जनपद की कारागार में भी दो अपराधी गुटों के बीच गैंगवार हुआ था। जिसमें दो शातिर अपराधी मारे भी गए थे। उस वक्त इस गैंगवार के तार भी मुख्तार अंसारी के गिरोह से जुड़े थे। इसी तरह 2009 में एक बंदी की संदिग्ध हालात में मौत होने पर भी जेल में काफी बवाल कटा था। जिसे बड़ी मुश्किल से काबू किया गया था। पांच साल पूर्व यानी 2016 में जिला कारागार की दीवार बांधकर तीन बंदी फरार भी हो चुके हैं। इसके बाद से ही कारागार की सुरक्षा व्यवस्था और भी चाक चौबंद कर दी गई है।
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