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अस्पताल के डाक्टर की रिपोर्ट पाजीटिव

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उरई। जिला अस्पताल में तैनात एक 58 वर्षीय डाक्टर में कोरोना की पुष्टि होने के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया। जिले का यह पहला कोरोना पॉजिटिव मामला है। डाक्टर में कोरोना की पुष्टि होने के बाद जिला अस्पताल समेत सीएमओ और डाक्टरों के आवासीय परिसर को सैनिटाइज करने का काम शुरू कर दिया गया। सीएमओ डा. अल्पना बरतारिया ने बताया कि डाक्टर के संपर्क में रहने वालों की सूची बनाई जा रही है। जिला अस्पताल और सीएमओ आवासीय परिसर को को सैनिटाइज किया जा रहा है। देर रात केजीएमयू, लखनऊ में पत्नी, बेटी-बेटा और नौकर के सैंपल लिए गए।
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सीएमओ के आवासीय परिसर में रहने वाले जिला अस्पताल के कोरोना संक्रमित डाक्टर की ड्यूटी बीती सात अप्रैल को मेडिकल कालेज में लगाई गई थी। तीन दिन पूर्व (21 अप्रैल) अचानक डाक्टर को तेज बुखार के साथ गले में दर्द की शिकायत हुई। मेडिकल कालेज में उपचार को भर्ती कर लिया। बृहस्पतिवार की रात उन्हें मेडिकल कालेज से जिला अस्पताल स्थानांतरित कर दिया गया। जहां से शुक्रवार की दोपहर तक आराम न मिलने के कारण उनको एंबुलेंस से लखनऊ केजीएमयू रेफर कर दिया गया। डाक्टर के साथ उनकी पत्नी भी लखनऊ रवाना हो गई। सीएमओ डा. अल्पना बरतारिया ने बताया कि डाक्टर का बेटा भी लखनऊ में रहकर एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है।
बताया कि शनिवार की देर रात झांसी मेडिकल कॉलेज से डाक्टर की कोरोना की जांच रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इसके बाद से ही डाक्टर के संपर्क में आने वाले अस्पताल के स्टाफ और जहां पर डाक्टर भर्ती थे, उस वार्ड को पूरी तरह सैनिटाइज किया जा रहा है। बताया कि डाक्टर के संपर्क में आने वाले स्टाफ को भी क्वारंटीन किया जाएगा। बताया कि शनिवार देर रात तक स्टाफ की सूची फाइनल हो जाएगी। उधर, जिलाधिकारी मन्नान अख्तर का कहना है कि देर रात झांसी से आई रिपोर्ट में डॉक्टर पाजिटिव मिले हैं। लिहाजा रविवार से और एहतियात बरती जाएगी। स्वास्थ्य कर्मियों की जांच पड़ताल के लिए टीम लगाई जाएगी। बताया कि जिले में कोरोना पॉजिटिव का पहला केस है। प्रयास किया जाएगा कि और संक्रमण न फैल सके।
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डाक्टर का परिवार भी होगा क्वारंटीन
स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने बताया कि सीएमओ आवासीय परिसर में डाक्टर अपनी पत्नी के साथ ही रहते थे। बेटा लखनऊ में और बेटी गुरुग्राम में रहती थी। फिलहाल घर पर ताला लगा है और परिवार के सभी लोग डाक्टर के साथ लखनऊ में ही है। लिहाजा डाक्टर की रिपोर्ट की जानकारी लखनऊ भेजी जा रही, ताकि परिवार वालों को क्वारंटीन किया जा सके।
बिना मरीज डाक्टर कैसे हुए संक्रमित!
हैरत की बात तो यह है कि लॉकडाउन के एक महीने बाद भी अभी तक एक भी कोरोना पाजिटिव केस सामने नहीं आया था और अचानक जिला अस्पताल के डाक्टर के ही संक्रमित निकल आने से अधिकारी भी हैरत में हैं। शुरुआत जांच से जो बात निकलकर आ रही, उसके अनुसार, 11-12 अप्रैल के आसपास डाक्टर गुरुग्राम में एक कंपनी में काम करने वाली बेटी को लेने गए थे। वहीं से उनके कोरोना संक्रमित होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
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