जालौन। बीते कई महीनों से बदले हुए सामाजिक हालातों ने बच्चों की जीवन शैली में भी खासा बदलाव ला दिया है। नगरीय क्षेत्र में जहां बच्चे अक्सर मोबाइल पर व्यस्त नजर आते हैं तो वहीं, ग्रामीण क्षेत्र में शाम होते ही बच्चे छतों पर चढ़कर आउटडोर गेम का मजा लेते नजर आते हैं। बच्चों को अब स्कूल की टेंशन नहीं है वो घर में धमाल कर रहे हैं।
कोरोना कर्फ्यू और कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए अभिभावक अपने बच्चों को बाहर भेजने में कतरा रहे हैं। पिछले दिनों जहां बच्चों की दिनचर्या में सुबह स्कूल के लिए तैयार होकर स्कूल में जाना और लौटकर होमवर्क व ट्यूशन के बाद समय मिलने पर आस पड़ोस के बच्चों के साथ आउटडोर गेम खेलना था। वहीं कोराना ने बच्चों की भी दिनचर्या बदल दी है। अब न स्कूल की टेंशन और न ही ट्यूशन की फिक्र।
अधिकांश अभिभावक घरों पर ही बच्चों को पढ़ा रहे हैं। कोरोना के चलते ट्यूशन भी स्थगित हैं। पिछले वर्ष जहां ऑनलाइन क्लासों में बच्चे व्यस्त रहते थे। वर्तमान में ऑनलाइन क्लासें भी नहीं चल रही हैं। क्योंकि सत्र समाप्त हो चुका है। लेकिन ऐसे में भी बच्चों को खेलने के लिए इंतजार करना पड़ता है। कोरोना के बढ़ते संक्रमण को देखते हुए अभिभावक बच्चों को बाहर खेलने के लिए नहीं भेज रहे हैं। आस पड़ोस के बच्चों के साथ खेलना अब बंद हो चुका है। नगरीय क्षेत्र में जहां बच्चे कोरोना कर्फ्यू में घरों के अंदर रहकर मोबाइल गेम में व्यस्त रहते हैं।
कुछ घरों एवं ग्रामीण क्षेत्र में बच्चों ने छतों को ही आउटडोर गेम खेलने का साधन बना लिया है। शाम के समय जैसे ही मौसम की नजाकत बदलती है वह भाई, बहनों के साथ खेलने के लिए छतों पर पहुंच जाते हैं। नगरीय क्षेत्र में जहां पापा, मम्मी के साथ बैठकर बच्चे मनोरंजन के लिए मोबाइल अथवा इनडोर गेम का सहारा लेते हैं। तो ग्रामीण क्षेत्र में छतों पर चढ़कर शाम का आनंद लेते हैं और खो-खो, कबड्डी, आइस-वाटर आदि गेम खेलकर अपना मनोरंजन कर रहे हैं।