कालपी। चार दिनों से यमुना का जलस्तर खतरे के निशान 108 मीटर के नीचे 107.40 मीटर पर बना हुआ है। जलस्तर का न बढ़ना राहत की बात है पर दुश्वारियां अभी भी बरकरार हैं। तीन गांवों का संपर्क मार्ग अभी भी मुख्यालय से कटा है। लोगों को 30 से 40 किमी घूमकर या फिर नाव से मुख्यालय आना पड़ रहा है।
वर्तमान में यमुना का जलस्तर खतरे के निशान से 60 सेंटीमीटर कम है। हथिनी कुंड बांध से पानी छोड़ने के अलावा राजस्थान एवं मध्य प्रदेश में हुई बारिश का असर यमुना नदी में दिखाई दे रहा है। चार दिन बीत जाने के बावजूद भी यमुना का जलस्तर स्थिर बना हुआ है। यमुना का जलस्तर स्थिर रहने से रायड, दिवारा एवं मंगरौल पड़री रपटा डूबा हुआ है। जिससे यहां के ग्रामीणों को चार दिन से अधिक होने के बावजूद भी नाव से तहसील मुख्यालय आना पड़ रहा है। या फिर इन गांव के ग्रामीणों को 30 से 40 किलोमीटर चक्कर काटकर मुख्यालय आना पड़ रहा है।
एसडीएम मनोज कुमार सिंह ने बताया कि फिलहाल अभी यमुना के जलस्तर में बढ़ने की कोई आशंका नहीं है। एक या दो दिन बाद जलस्तर में और कमी होने की संभावना है। यमुना के तटीय क्षेत्रों के ग्रामीणों को सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
रबी की फसल के लिए किसानों की चिंता बढ़ी
जुलाई माह में यमुना का जलस्तर दो बार बढ़ चुका है, जिससे यमुना तटीय क्षेत्र के ग्राम कीरतपुर, धर्मपुर, देवकली, गुढाखास, मंगरौल, महेवा,पड़री, नरहान, दहेलखंड के अलावा लगभग 36 गांव बाढ़ प्रभावित रहे थे। इन गांव में किसानों की खरीफ की फसलें यमुना के पानी में डूब कर खराब हो चुकी हैं। इसके बाद किसानों को अब रबी की फसलों में भी बुआई करने में देरी हो रही है। यमुना का जलस्तर अगर समय से कम नहीं होता है तो किसानें की रबी की फसलों की बुआई समय से नहीं हो पाएगी।