गोष्ठी को संबोधित करते न्यायिक अधिकारी।
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सेव द गर्ल चाइल्ड डे के अवसर पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें सिविल जज जूनियर डिवीजन कोंच विजय कुमार ने बालिकाओं के सामाजिक महत्व पर प्रकाश डाला। साथ ही बालिकाओं की घटती संख्या पर चिंता जताई। उन्होंने कन्या भ्रूण हत्या को सामाजिक अभिशाप की संज्ञा दी। कहा कि समाज को अपनी मानसिकता सकारात्मक रूप से बदलनी होगी।
जनपद न्यायाधीश प्रदीप कुमार कंसल के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में जनपद दीवानी न्यायालय सभागार में हुई गोष्ठी में चिकित्साधिकारी रवींद्र कुमार अग्रवाल ने कहा कि गर्भ में पल रहे प्रत्येक कन्या शिशु को जन्म लेने का अधिकार है। जन्म से पूर्व शिशु का लिंग परीक्षण व चयन पीसी-पीएनडीटी एक्ट के अंतर्गत दंडनीय है। कहा कि
सामाजिक कुरीति की रोकथाम के लिए बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ नामक योजना पूरे देश मेें लागू की गई है। उन्होंने लिंग परीक्षण और अल्ट्रासाउंड सेंटर की वैधानिकता के विषय मेें जानकारी दी। रमाकांत द्विवेदी ने पीसी-पीएनडीटी एक्ट के महत्व पर प्रकाश डाला। राजेश्वरी प्रजापति ने कहा कि लिंग चयन के माध्यम से जन्म के पूर्व बहुत से परिवार लड़के के जन्म
का प्रयास करते हैं। रिहाना मंसूरी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का शिशु लिंगानुपात 902 है, इससे पूर्णतया स्पष्ट है कि एक हजार लड़कों पर 101 लड़कियों की कमी है। विनोद प्रकाश, मनोज दीक्षित, राजेश कुमार, कालूराम प्रजापति, संतोष, केके प्रजापति, उमेश चंद्र श्रीवास्तव, अरुण यादव आदि मौजूद रहे।