बादाम के पेड़ के बारे में जानकारी देते युवा किसान सुशील
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आटा। परासन गांव के युवा किसान ने अपनी बंजर तीन बीघा जमीन को उपजाऊ बनाकर उसमें फल और फूलों की पैदावार की मिसाल कायम की है। हाल-फिलहाल इस जमीन पर पैदा होने वाले फल वह गांव वालों को बांट देते हैं। गांव में होने वाली शादी और धार्मिक कार्यक्रमों के लिए मुफ्त में गुलाब के फूल दे देते हैं।
सुशील तिवारी ने स्नातक तक पढ़ाई की है। सरकारी नौकरी न मिलने पर उन्होंने कुछ अलग करने की सोची। उन्होंने अपनी पिता से बंजर पड़ी तीन बीघा फसल में बागवानी करने की बात कही तो वह तैयार हो गए। सुशील ने वर्ष 2019 में रात-दिन मेहनत कर अपनी बंजर जमीन को उपजाऊ बनाकर समतल कर लिया। इसके बाद उन्होंने लखनऊ के मलिहाबाद से 30 हजार रुपये के फूलों व फलों की पौध मंगवाई। उन्होंने अमरूद, नासपाती, संतरा, बादाम, नींबू, करौंदा, लीची, आंवला, जामुन, सफेद व लाल गुलाब के फूल के पौधे रोपे।
उनकी मेहनत दो साल बाद 2021 में रंग लाई। अमरूद की पांच व नींबू की एक क्विंटल पैदावार हुई। करौंदा, लीची, आंवला, जामुन, नाशपाती, बादाम की पैदावार भी हुई। उन्होंने बताया कि अभी इस जमीन पर पैदा होने वाले फल वह गांव के लोगों को मुफ्त में बांट देते हैं। वह फल और फूलों की पैदावार के लिए गोबर की खाद का ही प्रयोग करते हैं।