स्टेट बैंक के एटीएम पर ग्राहकों की लाइन।
- फोटो : अमर उजाला
नोट बंदी के बाद से कैश को लेकर मारा मारी अभी थमती दिखाई नहीं दे रही। हालांकि बैंकों में स्थिति में सुधार हुआ है और उरई के कुछ बैंकों में पर्याप्त मात्रा मेें कैश उपलब्ध भी है। नोट बंदी के 48 दिन बीतने के बाद भी ग्रामीण क्षेत्रों में अब भी स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। रोजाना बैंकों में कैश को लेकर ऊहापोह की स्थिति देखने को मिलती है। मंगलवार को शहर की बैंकों में ग्राहकों की भीड़ रही।
बैंकों में सुबह से ही ग्राहकों की कतारें लग गई थी। बैंक के एटीएम के बाहर लोगाें की भीड़ और दिनों की अपेक्षा थोड़ी कम दिखी। लेकिन फिर भी लोगों को करीब आधा घंटा तक लाइन में खड़ा होना पड़ा। इस दौरान एटीएम से लोगों को अब भी 2000 रुपये ही मिल रहे हैं जिसकी लिमिट बढ़ाने की लोगों ने मांग की है।
वहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में बैंक में अब भी कैश की किल्लत है और लोगों को एटीएम के बाहर अब भी घंटों खडे़ रहना पड़ता है। कोंच, जालौन और कालपी, माधौगढ़ इलाकों में अब भी स्थिति बदतर बनी हुई है। नोटबंदी से व्यापारी, आम आदमी, दुकान सभी परेशान घूम रहे हैं।
शहर के एसबीआई, यूनियन बैंक, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, ओवरसीज बैंक, केनरा बैंक, इलाहाबाद बैंक सिटी शाखा में नोटबंदी का साफ असर देखने को मिला। रोज की तरह मंगलवार को भी यहां पर खातेधारकों की भीड़ रही।
ग्रामीण क्षेत्रों के बैंकों में खातेधारक कैश के लिए सुबह से ही लाइन में लग गए और देर शाम तक कतारबद्ध तरीके से लगे रहे। बैंकों में कैश को लेकर स्थिति सामान्य नजर नहीं आई।