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बच्चे सड़कों पर, नहीं आती मैडम

Mon, 03 Oct 2016 11:18 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
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रामपुरा क्षेत्र के जसुवापुर स्थित प्राथमिक विद्यालय बंद होने से बाहर खडे़ बच्चे। - फोटो : अमर उजाला
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अफसरों की हीलाहवाली के चलते बीहड़ क्षेत्र की शिक्षा व्यवस्था बुरी तरह से चरमराई हुई है।  यहां नियमित रूप से विद्यालय नहीं खोले जा रहे हैं। जो किसी तरह खुल भी रहे हैं उनमें समय पर टीचर नहीं पहुंचते। बच्चे भी इंतजार करने के बाद घर लौट जाते हैं। बीहड़ की शिक्षा व्यवस्था को परखने के लिए जब अमर उजाला प्रतिनिधि सोमवार को रामपुरा क्षेत्र के जसुवापुर
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पहुंचा तो वहां प्राथमिक विद्यालय सुबह 10.30 बजे तक नहीं खुला था। स्कूल में ताला लटका होने से बच्चे व रसोइया सुशीला बाहर खड़े थे। विद्यालय में पंजीकृत बच्चों शिवानी, विकास, काशिक, प्रतीक, रितिक, मीनाक्षी आदि ने बताया कि विद्यालय में मास्साब तो नियमित रूप से आते हैं, लेकिन यहां तैनात अध्यापिका महीने में एक दो बार ही आती हैं। वे जब आती हैं

तब भी पढ़ाती नहीं हैं। नियमित रूप से पढ़ाई न होने से बच्चों का कोर्स तो पिछड़ ही रहा है, इसके साथ ही उनका भविष्य भी चौपट होता दिखाई दे रहा है। ग्रामीणों ने इस विषय में कई बार शिकायत भी की लेकिन कोई कार्रर्वाई नहीं की गई।
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शिकायत पर नहीं दिया जाता ध्यान
ग्रामीण अजय, छुन्ना, चंद्रशेखर आदि ने बताया कि ध्वस्त शिक्षा व्यवस्था और अध्यापिका की लापरवाही को लेकर कई मर्तबा विभागीय अधिकारियों से शिकायत की। जब यहां बात नहीं बनी तो उन्होंने तहसील दिवस व निरीक्षण करने आए अफसरों को भी अवगत कराया गया। लेकिन किसी से कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। कार्रवाई न होने से अध्यापिका के हौसले बुलंद हैं। वह कभी कभार ही विद्यालय आती हैं।

नहीं बटी बच्चों को किताबें
प्राथमिक विद्यालय जसुवापुर में अध्यापक व अध्यापिका ने लापरवाही की हद कर दी। स्कूल में पजीकृत बच्चों को अब तक किताबें नहीं बांटी गईं। बच्चों ने बताया कि किताबें न मिलने की वजह से कोर्स भी पिछड़ता जा रहा है। मास्साब व मैडम से किताबों के लिए कहा भी गया, लेकिन उन्होंने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

मामला गंभीर, होगी कार्रवाई
प्राथमिक विद्यालय में तैनात अध्यापिका कब से स्कूल नहीं आ रहीं हैं, इसकी जांच कराई जाएगी। निरीक्षण भी किया जाएगा। अगर अध्यापिका गायब मिलती हैं तो कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। किताबें जल्द वितरण करने के निर्देश भी दिए जाएंगे। -प्रदीप कुमार पांडे, बेसिक शिक्षाधिकारी, जालौन 
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