मौसम का मिजाज बदलने और वातावरण में नमी बढ़ने के चलते अस्थमा, खासी, जुकाम, वायरल फीवर और अन्य संक्रामक रोगों का प्रकोप बढ़ गया है। राजकीय मेडिकल कालेज और जिला अस्पताल समेत क्षेत्र के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर मरीजों की भारी भीड़ लग रही है।
अकेले राजकीय मेडिकल कालेज उरई मे रोजाना संक्रामक बीमारियों के 300 से 400 मरीज आ रहे हैं। लगभग यही संख्या जिला अस्पताल के ओपीडी की भी है। इसके अलावा जिले के अन्य प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी रोजाना एक हजार से अधिक मरीज संक्रामक बीमारियों से ग्रस्त होकर आ रहे हैं।
मेडिकल कालेज के मेडिसन विभाग के डॉ. अरविंद चंसौलिया के अनुसार मौसम बदलने की वजह से अस्थमा केे मरीजों में बढ़ोत्तरी हुई है। इस वजह से प्रतिदिन अकेले अस्थमा के 60 से 70 मरीज मेडिकल कालेज आ रहे हैं। ऐसे मौसम मेें मरीजों को सुबह व शाम की सर्दी से बचाव करना चाहिए।
बचाव न करने की स्थिति में एलर्जी भी बढ़ सकती है। मेडिकल कालेज के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. मेजर रणवीर सिंह ने बताया कि यह मौसम का संधि काल है। इस दौरान कई वायरल बीमारियां अपने आप पैदा हो जाती हैं।
इस मौसम में व्यक्ति को खुले में नहीं सोना चाहिए क्योंकि अब सुबह की ओस पड़ने से वातावरण मेें नमी बढ़ती जा रही है। इससे बुखार, जुकाम, खासी केे अलावा हाथ पैर में दर्द की शिकायतें भी बढ़ रही हैं।
इसकेे अलावा मच्छरों से बचने केे इंतजाम भी किए जाने चाहिए क्योंकि 15 अक्तूबर तक डेंगू जैसे मच्छरों का प्रकोप बना रहेगा। उन्होंने लोगों को मच्छरदानी का प्रयोग करने की सलाह दी।