रावण ने मनुष्य को पशु बनाया किंतु राम ने पशुओं को मानवीय गुण सिखाए।
पराजित होने के बाद स्वयं मृत्यु शैया पर पड़ा रावण राम से कहता है कि आप
की विजय इसलिए हुई है कि आप चरित्रवान है और वह हर प्रकार से उनसे सबल होते
हुए मृत्यु शैया पर इसलिए पड़ा है कि उसने अपना चरित्र खो दिया। संत
राजेश्वरानंद सरस्वती महाराज ने नगर के भुंजरया चौराहे पर श्री
राम
राज्याभिषेक के अवसर पर प्रवचन करते हुए ये बातें कहीं। श्री बाल
रामलीला समिति के तत्वावधान में यहां रामलीला के समापन पर श्री राम
राज्याभिषेक के दौरान भगवान राम और सीता का गुरु वशिष्ठ ने तिलक कर उन्हें
अयोध्या का राजा घोषित किया। प्रभु श्रीराम ने लंका विजय के बाद अपने साथ
आए मित्रों विभीषण, सुग्रीव, अंगद, गुह, जामबंत आदि को सुंदर
वस्त्राभूषण
प्रदान कर विदा किया और हनुमान को अपनी सेवा का अवसर प्रदान करते हुये रोक
लिया। वेदों ने स्तुति गाई। राम का सुंदर अभिनय अमन रावत, लक्ष्मण का
प्रियम शुक्ला, सीता का आदित्य मिश्रा, भरत का सक्षम वैद, शत्रुघ्न का
आर्यन मिश्रा तथा हनुमान का किरदार रवींद्र तिवारी ने निभाये। इस अवसर पर
संत राजेश्वरानंद सरस्वती ने रामत्व और रावणत्व का
भेद बहुत ही सुंदर
शब्दों में बताया। बताया कि रावण ने अपने मामा मारीच को स्वर्ण मृग बनने के
लिए विवश कर दिया अर्थात मनुष्य को पशु बना दिया, जबकि राम ने वानरों को
मानवोचित गुणों से भरते हुए मनुष्य बना दिया। उन्होंने कहा कि राम का
आविर्भाव ही सुख का सूचक है। भगवान हमेशा दूसरों के कल्याण की सोचते हैं
जबकि व्यक्ति केवल स्वयं के बारे में सोचता है। उन्होंने कहा कि स्वयं
परमात्मा कहता है कि मनुष्य रूप बहुत ही जतन के बाद प्राप्त होता है अत:
इसका सदुपयोग करना चाहिए। इस अवसर पर सीताराम अमीन, अंबरीश रस्तोगी,
ब्राह्मण महासभा अध्यक्ष देवीदयाल रावत, विनोद दुवे दरोगाजी, रामकिशोर
पुरोहित, दीपक मिश्रा, अभिषेक रिछारिया, दीपू सोनी, दुर्गेश शुक्ला, लला
यादव, ललूस यादव, रूचिर रस्तोगी, मनोज कुमार अग्रवाल, राजीव अग्रवाल, दीपक
अग्रवाल, बेटू, आदि मौजूद रहे।