गांव बरसार में विचित्र बीमारी की चपेट में आकर तीन मासूमों की मौत व कई बच्चों के बीमार होने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के आला अफसर आंख मूंदे हुए हैं। गुरुवार को स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और लोगों का ब्लड का सैंपल लेकर खानापूरी कर लौट गई।
शुक्रवार को विभाग के किसी भी अफसर ने गांव में झांकने की जहमत नहीं उठाई। इससे ग्रामीणों में खासा आक्रोश है। वहीं, ग्रामीणों ने इस बात पर नाराजगी जताई है कि गांव के स्वास्थ्य केंद्र पर अक्सर ताला ही लटका रहता है।
‘अमर उजाला’ टीम ने गांव पहुंचकर लोगों से बातचीत की तो उनका पीड़ा फूट पड़ी।
गांव में जिन परिवारों के बच्चों की बीमारी की चपेट में आकर जान गई है, उनका रो रोकर हाल बेहाल है। गांव वालों का साफ-साफ कहना है कि स्वास्थ्य विभाग ने कल गांव में सिर्फ खानापूरी भर की है। गांव के राजेंद्र यादव, बालादीन, शिवराज, अयोध्या प्रसाद बताते हैं कि विचित्र बीमारी के पांव पसारने से पूरा गांव दहशत में है।
कई लोगों का दिल्ली तक उपचार हो रहा है, लेकिन स्थानीय प्रशासन पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए है।
वहीं, गांव का हाल यह है कि सफाई व्यवस्था दुरुस्त न होने से जगह-जगह कूड़े का ढेर लगा है। गंदगी से पटी नालियां बजबजा रही हैं।
ग्रामीणों की माने तो ग्राम प्रधान हरिराम उरई में रहते है और सफाई कर्मचारी कल्लू व देशराज गांव कभी नहीं आते। गांव में पीने के पानी का भी संकट है। कुएं का पानी प्रदूषित है, फिर भी मजबूरी में उसे ही पीना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने डीएम रामगणेश से गांव आकर यहां की स्थित देखने की बात कही है।
उधर, स्वास्थ्य सेवाओं के अभाव में ग्रामीण अब झोला छाप डॉक्टरों का सहारा ले रहे हैं। झांसी से इलाज करवाकर लौटे छोटू के पिता ख्याली राम ने बताया कि झांसी से जो जांच रिपोर्ट आई है, उसमें गले में संक्रमण होने की बात कही गई है। उसने बताया कि डॉक्टर का कहना है कि यह रोग गंदगी के कारण होता है।