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Jalaun News: अपना दल के तीन चेहरे, एक पर होगा एनडीए का सेहरा

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उरई। भाजपा गुटबाजी का तोड़ बनने जा रहीं अनुप्रिया पटेल की पार्टी के टॉप तीन चेहरों की तलाश शुरू कर दी गई है।
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अपना दल के वरिष्ठ और कद्दावर नेताओं में शीर्ष तीन पर चर्चा के बाद उनकी छवि और क्षेत्र में स्थिति परखने के लिए सर्वे होगा। इनमें जो टॉप अंकों के साथ रिपोर्ट में सबसे आगे होगा, एनडीए के पास उसी की दावेदारी पेश की जाएगी। इसमें जातिगत समीकरण को भी ध्यान में रखा जाएगा।
अपना दल (एस) को जालौन सीट से टिकट मिलना लगभग तय माना जा रहा है। पार्टी के नेता खुलकर यह बात बताने से हिचक रहे हैं। पार्टी के ही एक वरिष्ठ नेता की माने तो एनडीए की सबसे बड़ी पार्टी भाजपा से अपना दल की राष्ट्रीय अध्यक्ष अनुप्रिया पटेल को आश्वासन के साथ संकेत दे दिया गया है।
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इसीलिए खुद अनुप्रिया पटेल बुंदेलखंड की इस सीट पर जमीनी तैयारी में जुट गई हैं। पूरे चुनाव में अनुप्रिया ही चेहरा होंगी, लेकिन सुरक्षित सीट होने की वजह से उनकी पार्टी की अच्छी छवि रखने वाला दमदार कार्यकर्ता मैदान में उतरेगा। संदेश मिलने के बाद पार्टी के कद्दावर और वरिष्ठ नेता अपनी पार्टी के हाईकमान से संपर्क साधना शुरू कर दिया है।
हालांकि अभी दावेदारी के लिए आवेदन शुरू नहीं हुए हैं। एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि पार्टी बूथ स्तर से ये तैयारी शुरू करेगी। राष्ट्रीय अध्यक्ष के व्यक्तित्व, उनकी ईमानदार और तेज तर्रार छवि को जनता के सामने प्रस्तुत किया जाएगा, महिलाओं पर सबसे ज्यादा फोकस होगा। क्षेत्रीय समस्याओं की सूची तैयार होगी, जो घोषाणापत्र में शामिल किया जाएगा। सूत्रों की मानें तो भाजपा को विश्वास है कि अनुसूचित जाति के लिए इस सुरक्षित सीट पर कुर्मी वोटरों की संख्या काफी होने से फायदा मिलेगा। गुटबाजी पर विराम लगेगा और जीत की संभावनाएं बढ़ जाएंगी।


1962 से अब तक 15 सांसद जिले को मिले हैं। इनमें छह बार भाजपा, पांच बार कांग्रेस और एक-एक बार बसपा, सपा, जनता दल, जनता पार्टी से सांसद रहे हैं। वर्तमान में भाजपा दो बार लगातार सांसद भानु प्रताप सिंह वर्मा के साथ सीट पर कायम है। चर्चा है कि भाजपा अपने ही नेता को टिकट दे, इसके लिए पार्टी के बड़े नेताओं ने हाईकमान से बातचीत शुरू कर दी है। अपना दल की बुंदेलखंड में प्रवेश करने की मंशा के पक्ष में जाने के नुकसान गिनाने शुरू कर दिए हैं। भाजपा की यह सीट इस बार भी बरकरार रहे इसके लिए हर संभव कोशिश की जा रही है।
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कद्दावर हाईकमान को समझाने में कामयाब होते हैं तो दावेदारी की तैयारी कर चुके जिले के तीन जन प्रतिनिधि के साथ ही कानपुर देहात की पूर्व मंत्री महिला नेता और पूर्व आईआरएस अधिकारी में से कोई एक चेहरा भाजपा चुन सकती है। हालांकि चुनौती गुटबाजी खत्म करना है। इसलिए टिकट जिले के बाहर, यानि कानपुर देहात या झांसी भी जा सकता है। फिलहाल यह चर्चा एनडीए की दोनों ही राजनीतिक पार्टियों के लिए खलबली का कारण बन गई है।
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