कोंच। नगर हो अथवा ग्रामीण क्षेत्र, सहकारी समितियों से लेकर अन्य खाद वितरण केंद्रों पर यूरिया के लिए मारामारी हो रही है। फसल बुआई के समय पहले किसान डीएपी के एक-एक पैकेट के लिए जूझते रहे, अब यूरिया के लिए धक्के खाने पड़ रहे हैं। किसान केंद्रों के बाहर डेरा डाले हैं और अपना नंबर जल्दी आ जाने के चक्कर में आधी रात से ही किसान लाइन में खड़े हो जाते हैं।
बुआई के बाद अब गेहूं, मटर, चना, मसूर आदि फसलों की पहली सिंचाई की जा चुकी है। इसलिए अब किसानों को यूरिया की जरूरत पड़ रही है, लेकिन किसानों की जरूरत के हिसाब से किसानों को यूरिया नहीं मिल पा रही है। किसानों को जरूरत के हिसाब से खाद न मिलने पर उनमें आक्रोश है।
जुझारपुरा सहकारी समिति, सहकारी क्रय विक्रय समिति, पीसीएफ केंद्र, साधन सहकारी समिति अंडा स्थल कोंच मंडी सहित ग्रामीण क्षेत्रों में खाद के लिए किसान परेशान हैं। किसानों ने आरोप लगाया है कि समिति के कर्मचारी अपने परिचितों को आसानी से यूरिया उपलब्ध करवा रहे हैं।
सोमवार को जब खाद वितरण केंद्रों का जायजा लिया गया तो सिर्फ पीसीएफ केंद्र पर ही थोड़ी बहुत खाद उपलब्ध दिखी जिसके लिए लंबी लाइन लगी थी।
कृषक भारतीय सेवा केंद्र के प्रभारी हरकिशुन, क्रय विक्रय समिति के सचिव सुरेंद्र पाल सिंह, जुझारपुरा सहकारी समिति के सचिव प्रियंक पांडे का कहना है कि यूरिया की जितनी मांग है उस हिसाब से यूरिया उपलब्ध नहीं हो पा रही है। फिलहाल जितनी खाद केंद्रों पर है, स्टॉक के हिसाब से आधार कार्ड व खतौनी की नकल जमा कराकर किसानों के बीच बांटी जा रही है।
गांव पचीपुरा के निवासी मलखान सिंह को 10 बोरी खाद की जरूरत है, जिसके लिए वह पिछले तीन दिन से खाद बिक्री केंद्रों पर चक्कर लगा रहे हैं। उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है जिससे वह खासे परेशान हैं। मलखान ने बताया कि यूरिया न मिलने पर उनकी गेहूं की फसल प्रभावित हो रही है।
खाद के लिए परेशान होने वालों की संख्या सैकड़ों में है जो कई-कई दिन से खाद बिक्री केंद्रों पर चक्कर काट रहे हैं। उन्हें खाद नहीं मिल पा रही है। कैलिया गांव के रहने वाले उमाशंकर तिवारी भी उन्हीं में से एक हैं जो रोज ही गांव से आ रहे हैं लेकिन उनका नंबर नहीं लग पा रहा है। उनका कहना है कि आखिर कौन सा तरीका अपनाएं जिससे यूरिया मिल जाए।