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Jalaun News: जमानत पर छूटने के बाद रविंद्र बना था चंदुर्रा गांव का प्रधान

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उरई। कोंच कोतवाली क्षेत्र के चंदुर्रा गांव में पिता-पुत्र को जलाकर मौत के घाट उतारने वाला रविंद्र जेल से जमानत पर छूटने के बाद गांव का प्रधान बन गया था।
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वर्ष 2018 में हुई पिता-पुत्र की हत्या में आरोपी बनाए गए रविंद्र और उसके तीन साथियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। कुछ समय बाद वह जमानत पर बाहर आ गया। वर्ष 2021 में हुए ग्राम प्रधान के चुनाव में रविंद्र ने भी पर्चा भर दिया, क्योंकि तब तक उस पर दोष सिद्ध नहीं हुआ था। चुनाव में वह जीतकर प्रधान बन गया।

सोमवार को जब उसे सजा हुई तो वह रो पड़ा, क्योंकि वह तो अदालत में तारीख पर आया था। उसे पता नहीं था कि फैसला आना है। इसके बाद जेल जाने तक वह चुपचाप खड़ा रहा।
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उरई। वर्ष 2018 में हुई पिता-पुत्र की हत्या के मामले में रिंकू ने सात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। ट्रायल के दौरान आरोपी महेश की मौत हो गई थी। किशोर न्याय बोर्ड में एक नाबालिग का मामला विचाराधीन है। मुकदमे के दौरान कुल 14 गवाह गुजरे।





उरई। राशन कोटे को लेकर दोनों पक्षों में लंबे समय से तनाव चल रहा था। पहले गिरेंद्र कोटेदार थे। बाद में कोटा रविंद्र अहिरवार के नाम हो गया। इससे तनातनी और बढ़ गई थी। इसी विवाद के चलते रविंद्र ने अपने साथियों के साथ मिलकर गिरेंद्र की परचून की दुकान पर धावा बोला और पेट्रोल डालकर आग लगा दी थी जिसमें गिरवर (65) और उनके बेटे सुशील कुमार (38) की जलकर मौत हो गई थी। गिरवर के दूसरे बेटे रिंकू ने कोंच कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।






सरकारी कोटे की दुकान को लेकर दुकान में बैठे पिता-पुत्र की जलाकर हत्या कर दी गई थी। घटना में रविंद्र व उसके पिता महेश को आरोपी बनाया गया था। वादी रिंकू ने बताया था कि घटना के दौरान रविंद्र के पिता महेश ने अपनी लाइसेंसी बंदूक तान दी थी, जिससे वह दुकान के बाहर नहीं आ सकें। पुलिस आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। इसमें वर्ष 2024 में प्रधान रविंद्र के पिता महेश की जेल में ही मौत हो गई थी। बचाते समय गांव का ही एक वृद्ध भी झुलस गया था। जिसको लोगों ने अस्पताल में भर्ती कराया था।
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