फोटो- 13 कर कक्ष में फाइल को देखते हुए अधिकारी।संवाद
- टीएस को लगाई फटकार, तीन महीने पुराने नहीं बन पाए मृत्यु प्रमाण पत्र जताई नाराजगी
संवाद न्यूज एजेंसी
उरई। नगर पालिका में एडीएम व कोषाधिकारी ने अचानक छापेमारी की। छापे की सूचना मिलते ही कार्यालय में खलबली मच गई। इस दौरान अधिकारियों ने विभाग की दस संदिग्ध फाइल जब्त कीं। काम में लापरवाही पाए जाने पर कई कर्मचारियों को फटकार लगाई गई। निरीक्षण के दौरान उपस्थिति रजिस्टर में कई कर्मचारी अनुपस्थित मिले, उनका एक दिन का वेन रोकने का निर्देश दिया।
नगर पालिका कार्यालय में गुरुवार की सुबह 9: 25 बजे एडीएम संजय कुमार व वरिष्ठ कोषाधिकारी अनिल कुमार सिंह ने छापा मारा। कार्यालय पहुंचते ही अधिकारियों ने पालिका परिसर में मौजूद संदिग्ध व्यक्तियों से पूछताछ की। सुबह सवेरे कार्यालय खुलते ही अधिकारियों को देख पालिका कर्मचारी व अधिकारी आगे पीछे घूमने लगे। इसके बाद एडीएम कर कक्ष में पहुंचे। जहां पर उपस्थिति रजिस्टर देखा। जिसमें कुछ कर्मचारी अनुपस्थित मिले। जिस पर नाराजगी जताई।
इसके बाद एडीएम ने मकान स्थानांतरण की फाइलें देखी। जिसमें कई खामियां देख 10 फाइलें जब्त कर लीं। मकान मालिक के नंबर पर कॉल की तो जवाब मिला कि उन्हें जानकारी नहीं कि उनकी फाइल कब पूरी हो गई। कितनी उन्हें फीस भरनी है। जिसके बाद दस फाइल को जब्त कर लिया गया। कुछ फाइलें 2022 की मिलीं, जो पूरी नहीं थीं। जिस पर नाराजगी जताते हुए बाबू अखिलेश कुमार मिश्रा से जवाब मांगा कि दो साल पुरानी फाइल को अभी तक पूरा क्यों नहीं किया। इस पर वह कोई जवाब नहीं दे पाए।
इसके बाद अधिकारियों ने जन्म मृत्यु प्रमाण पत्र के कक्ष पर जांच की। कई मृत्यु प्रमाण पत्र ऐसे मिले जो तीन महीने से नहीं बन पाए थे। जिस पर नाराजगी जताई। कर्मचारियों ने बहाना बनाया कि ईओ नहीं है जिस पर उन्होंने फटकार लगाई कि एक अधिकारी के न होने से क्या काम रुक जाएंगे। ईओ डेढ महीने से नहीं है, लेकिन प्रमाण पत्र तो तीन महीने पुराने हैं। इसका कोई जवाब नहीं दे पाया। इसके बाद कई कर्मचारी अधिकारियों के नाम लिखकर टीम चली गई।
एडीएम ने बताया कि नगर पालिका ईओ, एसआई ओमप्रकाश चौधरी, लिपिक राकेश दूरवार, लिपिक मैथलीशरण गुप्ता, चुंगी मुहर्रम इंद्रपाल सिंह चौहान, अब्दुल गफ्फार अनुपस्थित पाए गए। जिन पर जवाब मांगा गया। ईओ के नहीं होने से कई काम लंबित पाए गए। उनका करवाने के लिए विभागीय कार्रवाई की जा रही है।
आप बीच में न बोले.... आप से जवाब नहीं मांगा गया
छापेमारी में कुछ फाइलों की जांच हो रही थी। जिसमें कई कमियां मिली। जिस पर टीम कर्मचारियों से जवाब मांग रही थी। लेकिन खुद को बचाने के लिए कर अधीक्षक बीच-बीच में सफाई पेश कर रहे थे। जिस पर एडीएम ने फटकार लगाई कि आप बीच में न बोले... जिस से जवाब मांगा गया है। उसी को बोलने दें।
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कार्यालय में आने के बाद भी उपस्थिति रजिस्टर पर नहीं किए हस्ताक्षर
कर निरीक्षक धर्मेंद्र सिंह दो दिन से नगर पालिका आ रहे थे। लेकिन उन्होंने उपस्थिति रजिस्टर पर हस्ताक्षर नहीं किए थे। जब टीम ने रजिस्टर जब्त कर लिया तो कर निरीक्षक सफाई देते हुए नजर आए कि दो दिन से वह आ रहे हैं। लेकिन हस्ताक्षर नहीं कर पाए हैं। लेकिन उनकी एक नहीं सुनी गई।
ईओ के कक्ष में मिले सभासद, नाराजगी जताई
छापेमारी के दौरान एक सभासद और प्रतिनिधि ईओ के कक्ष में बैठ हुए थे। जैसे ही टीम पहुंची तो वह कक्ष के बाहर आए तो एडीएम ने पूछा आप कौन है। पालिका में क्या कर रहे हैं। उन्होंने परिचय दिया तो पूछा आप अंदर क्या कर रहे थे। जब ईओ नहीं है। जिस पर वह जवाब नहीं दे पाए। मुंह नीचे करके बाहर निकल गए। जिससे उनकी खूब किरकिरी हुई।
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तहसील में 18 कर्मचारी मिले नदारद, मांगा स्पष्टीकरण
उरई। एडीएम संजय कुमार व कोषाधिकारी ने तहसील का भी निरीक्षण किया। इसमें एसडीएम हेमंत पटेल, तहसीलदार शेरबहादुर उपस्थिति मिले वहीं, 18 कर्मचारी नदारद मिले। तहसीलदार को निर्देशित किया कि अनुपस्थित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण मांगे। इसके बाद उन्होंने फरियादियों से बात की। इसमें कई फरियादियों ने शिकायत की, लेकिन उन्होंने जिन कर्मचारियों की शिकायत की। वह मौके पर नहीं मिले। फरियादी कीरत सिंह दोहरे ने बताया कि वह तहसील प्रांगण में हैसियत प्रमाण पत्र के लिए आए पर लिपिक आरती कुशवाहा अक्सर देर से आने से नहीं मिलीं। इस पर उन्होंने एसडीएम को कार्रवाई के लिए निर्देश दिए। संग्रह अनुभाग व राजस्व लिपिक के पटल पर कार्यरत कर्मचारी की कार्यशैली, पत्रावली का रखरखाव ठीक नहीं पाया मिली। जिस पर नाराजगी जताई। (संवाद)