कोंच। वागीश्वरी साहित्य परिषद की मासिक गोष्ठी द्वारिकाधीश मंदिर में संस्था अध्यक्ष ओंकारनाथ पाठक की अध्यक्षता में हुई। मां सरस्वती की वंदना संतोष तिवारी ने पढ़ी। कवि सुनीलकांत तिवारी ने सुनाया-आसमानी कद है पर किरदार में बौने लगे, पेड़ जब ऊंचे हुए तो छांव को खोने लगे।
गोष्ठी में ओंकार नाथ पाठक ने व्यंग्य पढ़ा-पत्नी के कथन पर कि पति की छाती पर सात जन्मों तक मूंग दलती रहूं, पति अभी तक बेहोश है। नरेंद्र मोहन मित्र ने सुनाया- आरती के शंख तो बजते रहे, आस्था के बंद द्वारे हो गए। मुन्ना यादव ने रचना पाठ किया, जिंदगी जीने से पहले हौसला पैदा करो, सिर्फ ऊंचे खूबसूरत ख्वाब मत देखा करो। नंदराम स्वर्णकार भावुक ने रचना बांची, हम युग निर्माता हैं हम भाग्य विधाता हैं।
डॉ. हरिमोहन गुप्त को अपना बचपन याद आया, अगर हो सके तो लौटा दो मेरा बचपन, दादा दादी के दुलार को मेरा चंचल मन। इसके अलावा नरोत्तमदास चातक, संतोष तिवारी सरल, राजेशचंद्र गोस्वामी, डॉ. एलआर श्रीवास्तव, अरुण वाजपेयी, चंद्रशेखर नगाइच मंजू,जवाहर अग्रवाल, अमर सिंह यादव,आशाराम, राजाभैया, चंद्रशेखर, संतोष, किशोर यादव आदि रहे। संचालन नंदराम ने किया।