मुहम्मदाबाद(जालौन)। प्रतिभा उम्र और तर्जुबे की मोहताज नहीं होती है, बशर्ते लीक से हट कर कुछ करने का जज्बा और जुनून हो। इस बात को तेरह साल की बाल मूर्तिकार सुलोचना ने सच साबित कर दिखाया है। नवरात्र महोत्सव के दौरान देवी पंडाल में स्थापित देवी प्रतिमाओं में सुलोचना की नन्ही उंगलियों से गढ़ी गई देवी भगवती की भव्य प्रतिमा श्रद्धालुओं को अभिभूत कर देती है। भक्तों में इन दिनों सिर्फ सुलोचना की ही देवी प्रतिमा की चर्चा है।
डकोर ब्लाक के कुसमिलिया गांव निवासी नृपत सिंह की 13 वर्षीय पुत्री सुलोचना हाईस्कूल की छात्रा है। सुलोचना जब कक्षा आठ की छात्रा थी तभी मूर्तिकला के प्रति उसकी अभिरूचि जागी। उसने देखा नवरात्र में लोग पंडाल में स्थापित करने के लिए दस से पचास हजार की महंगी देवी प्रतिमाएं खरीद कर लाते हैं। इसके लिए गांव भर से चंदा जमा किया जाता है। सुलोचना ने खुद देवी प्रतिमा गढ़ कर देवी पंडाल में स्थापित करने का फैसला किया। पहले साल उसने मेहनत से देवी दुर्गा की एक फुट ऊंची प्रतिमा तैयार की। दूसरे साल उसने इससे भी ऊंची प्रतिमा गढ़ी। इस साल सुलोचना ने चार फुंट ऊंची देवी दुर्गा की अष्टभुजा प्रतिमा तैयार कर स्थापित की । सुलोचना की देवी प्रतिमा का दर्शन करने के बाद अभिभूत ग्रामीण उसकी प्रतिभा की तारीफ करते नहीं थकते।
सुलोचना ने अमर उजाला को बताया तीन साल पहले उसने घर में बांस-कांस मिली मिट्टी से देवी प्रतिमा बनाई। अगले वर्ष गढ़ी देवी प्रतिमा में पेशेवर मूर्तिकारों जैसा रंग संयोजन, बारीकी और सफाई नहीं आ पाई। लेकिन उसने हिम्मत नहीं छोड़ी और कला सृजन जारी रखा। इस साल काफी मेहनत और लगन से बनी देवी भगवती की प्रतिमा श्रद्धालुओं को काफी प्रभावित कर रही है। इससे काफी रचनात्मक संतोष मिला है। सुलोचना कला सृजन के दौरान परिवार के सभी सदस्यों से मिली हिम्मत और सहयोग को याद करना नहीं भूलती। वह कहती है पिता जी ने जरूरी सामान मुहैया कराने के साथ हर पल संबल और प्रोत्साहन दिया।