उरई (जालौन)। जालौन में हिंदू मुसलिम एकता की मिसाल दिखाई दे रही है। सूतफेनी के हिंदू कारीगर गैर जनपद से यहां आकर मिठास पैदा कर रहे हैं। उसमें आपसी मेलमिलाप के कई रस घुले हैं। ऐसा ही एक रसनगर में सूतफेनी बनाने आए पचास हिंदू कारीगरों की लगन में देखने को मिलता है। ये कारीगर रमजान मुबारक के दौरान अपनी रिश्तेदारियों में होने वाली शादियों में शरीक नहीं होते हैं।
फतेहपुर जनपद का पनेरुआ ग्राम सूतफेनी कारीगरों के लिए जाना जाता है। छह-सात सौ कारीगर रोजेदारों के लिए सूतफेनी तैयार कर रहे हैं। इस बार पढ़ने वाले युवा भी अपने बड़ोें के साथ सफर पर निकले हैं। सालभर ये कारीगर सिंघाडे़, तंबाकू, गन्ने, अनाज आदि की फसल उगाते हैं परंतु रमजान में सूतफेनी बनाने में जुट जाते हैं।
विवेक कुमार ने बताया कि तीन वर्ष से उरई आ रहे हैं। यहां रमजान की चहल पहल में बहुत अच्छा लगता है। फूल सिंह कहते हैं कि उन्हें सालभर रमजान मुबारक का इंतजार रहता है।
शैलेंद्र सिंह ने कहा कि सुबह सहरी के वक्त उठना और नमाजे तराबीह तक जागना दिनचर्या बन जाता है।
विकास कहते हैं कि जब नन्हे रोजेदारों के हुजूम आकर हमारे काम को शौक से देखते हैं तो अजीब खुशी मिलती है। कैलाश ने बताया कि हमारा काम श्रम विभाजन का है। 11 जुलाई को शैलेंद्र की मौसी की लड़की की शादी थी लेकिन गांव नहीं जा पाए। अपनी बहन को फोन से ही दिलासा दी। बब्लू, दीपक, बृजेश ने भी करीब शादियों में गैर हाजिर रहे। वह कहते हैं कि हमारा रोजेदारों के संग जो रिश्ता है वह भी तो हमें निभाना है। ईद के बाद यह परदेसी अपने गांव चले जाएंगे।