उरई। लोकसभा चुनाव में भागीदारी के लिए आधी आबादी की तैयारी भी पूरी है। जनपद में करीब साढ़े बारह लाख मतदाताओं में महिला मतदाताओं की संख्या साढ़े पांच लाख से भी अधिक है। ऐसे में दो राय नहीं कि सांसद चुनने में महिलाओं की भूमिका भी अहम होगी। लिहाजा कुछ जागरूक महिलाओं से चुने जाने वाले सांसद पर बातचीत की गई तो उनके मन की बात भी सामने आई।
महिला मतदाताओं का कहना है कि सांसद क्षेत्र का विकास करने वाला तो होना ही चाहिए, साथ ही कुछ ऐसा भी करे कि जिससे घरों में खुशहाली आए, मतलब जनपद के प्राइवेट स्कूलों की फीस में कमी लाई जाए, सवारी वाहनों के लोकल किराए पर भी नजर रखे और कोटेदार से राशन व एजेंसियों से गैस मिलने में किसी तरह की दिक्कत न हो। इसके अलावा महिलाओं की सुरक्षा को भी प्राथमिकता दे। कुल मिलाकर सांसद का पूरा फोकस नेतागिरी, फीता काटने और भाषणबाजी में नहीं बल्कि धरातल पर दिखने वाले काम पर होना चाहिए।
कदौरा की मैनाज खातून का कहना है कि सांसद ऐसा होना चाहिए जो कि महिलाओं के हक की बात करे, परिवार और समाज में महिलाओं का सम्मान बढ़ाए। कदौरा की ही शाहिदा नाज ने कहा कि क्षेत्र के विभागों में महिलाओं की सुनवाई सबसे पहले हो, कोई महिला किसी अधिकारी के पास से निराश होकर न लौटे।
आटा की पूजा तिवारी कहती हैं कि ऐसे सांसद का चुनाव हो जो कि महिलाओं के लिए भी रोजगार के साधन उपलब्ध कराए, ताकि महिलाएं भी आत्मनिर्भर बन सके। एट की सुधा सिंह के मुताबिक, सांसद को चाहिए गांव कस्बों में सरकार की योजनाएं चलाकर छोटे-छोटे कामकाज से महिलाओं को जोड़े, जिससे उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार हो।
कालपी की रूबी सक्सेना महिला घर, समाज कहीं पर भी स्वयं को सुरक्षित नहीं महसूस करती है, सुरक्षा की पूरी गारंटी देने वाली सरकार का चुनाव करना होगा। शिक्षिका स्वयं प्रभा का कहना है कि सिर्फ वोटों की संख्या में ही नहीं महिलाओं को उनके अधिकारों की संख्या में भी ऊपर लाना होगा। लिहाजा महिलाएं बिना किसी प्रलोभन के मतदान करें।
रामपुरा की रचना कहती हैं कि महिलाओं और युवतियों के शैक्षिक स्तर को बढ़ाने वाले सांसद का चुनाव करना होगा, आज भी आधी आबादी में शिक्षा का अभाव है। जिसे दूर करना होगा। शिक्षिका सरोज अग्रवाल के मुताबिक महंगाई को कम करने वाली सरकार चुनी जाए, जिससे महिलाओं को भी घरों का बजट बनाने में कुछ सहूलियत हो सके।