एट (जालौन)। हाईवे पर हुए हादसे में पुलिस और स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही भी सामने आई है। ग्रामीणों की मानें तो घटना के तुरंत बाद उन लोगों ने 100 नंबर और एंबुलेंस को भी सूचना दी पर आधे घंटे तक कोई भी नहीं पहुंचा। जिस कारण मां और बेटियां हाईवे पर तड़पती रही।
इस दौरान कुछ लग्जरी गाड़ी वाले रुके तो जरूर लेकिन घायलों की हालत देख किसी ने उन्हें अपनी गाड़ियों में नहीं लेटाने दिया। तब तक घायलों के खून से हाईवे की सड़क लाल हो गई। आक्रोशित होने पर जब ग्रामीणों ने जाम लगाया, तब जाकर पुलिस और एंबुलेंस की गाड़ियां मौके पर पहुंची। जाम के कारण ट्रकों की लंबी कतार भी लग गई। जिनके बीच फंसे दो पहिया और चार पहिया वाहन सवार भी फंसे रहे।
बैग में मिले 10 हजार रुपये
सुधा के पास मिले बैग में पुलिस को 10 हजार रुपये और प्रिया के पास नई जैकेट मिली है। जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि वे अधिक खरीदारी के लिए घर से निकली थी। बैग में एटीएम और पासबुक भी मिली है।
दोनों कर रहीं थीं परीक्षा की तैयारियां
परिवार के करीबियों ने बताया कि प्रिया और डेजी दोनों इंटर व हाईस्कूल की छात्राएं थी और गुरुवार से शुरू होने वाली परीक्षाओं को लेकर काफी उत्साहित भी थी। क्या पता था यह सब हो जाएगा।
बेटी और नातिनों में बसती थी जान
रामदास अपनी बेटी सुधा और उसकी दोनों बेटियों को जान से ज्यादा प्यार करते थे। परिजनों ने बताया कि उनका एक बेटा फिरोजाबाद में प्राइवेट नौकरी करता है। यहां पर वे इन्हीं मां बेटियों के साथ जीवन बिता रहे थे।