माधौगढ़ (जालौन)। 15 हजार की आबादी और दस हजार 424 वोटरों वाले माधौगढ़ को तहसील का दर्जा मिले ढाई दशक बीत चुका है। दुकानदारों, व्यापारियों को ठीक ढंग से सुविधाएं न मिलने पर एक दर्जन व्यापारी बड़े शहरों की ओर पलायन कर गए। वहीं किसानों की उपज का वाजिब मूल्य न मिलने से किसान बदहाली पर आंसू बहा रहा है।
माधौगढ़ तहसील क्षेत्र से तीन विधायकों को लाल बत्ती से नवाजा जा चुका है। फिर भी विकास आज भी 18 वीं शताब्दी के दिन बयां कर रहे हैं। वहीं नेता चुनाव के समय आकर क्षेत्र में विकास की गंगा बहाने की बात कहते हैं लेकिन चुनाव के बाद फिर पलटकर भी नहीं आते हैं। अंग्रेजी शासनकाल के समय माधौगढ़ देशी घी, गुड़, आलू व सन के लिए मशहूर था।
मंगलवार व शनिवार के दिन कानपुर, औरैया, भिंड, दबोह, दतिया, मछंड, ग्वालियर, रौन, इटावा के व्यापारी ये सामान लेने आते थे। आज कोल्ड स्टोरेज के अभाव में उक्त चीजों का बाजार समाप्त सा हो गया है। पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह की सरकार के समय माधौगढ़ के लोगों ने तहसील के लिए अनशन किया था। संघर्ष के बाद सन 1995 में माधौगढ़ को तहसील का दर्जा प्राप्त हो गया।
उसी दौरान मुख्यमंत्री ने कहा था कि जालौन को इटावा से जोड़ देंगे। इसी के चलते सपा सरकार ने निनावली, महाराजपुरा, जुहीका घाट व पचनद पर करोड़ों रुपये के पुल देकर जालौन के विकास के रास्ते खोले लेकिन आवागमन के अभाव में माधौगढ़ का विकास जस का तस बना हुआ है। पूर्व विधायक संतराम सिंह सेंगर के माधौगढ़ में प्रस्तावित फायर ब्रिगेड बनाने की पहल रंग लाई।
अधिकारियों द्वारा तहसील के बगल में फायर ब्रिगेड का साइन बोर्ड लगाकर कार्य की इतिश्री कर ली। तहसील बने 23 वर्ष हो चुके हैं लेकिन आज तक तहसील का उद्घाटन नहीं हो सका। कहने को तो परिवहन मंत्री स्वतंत्र देव सिंह की कर्मभूमि वाला जिला से है, फिर भी मुख्यालय के लोग प्राइवेट बसों के सहारे हैं। जनता की मांग पर सरकारी बस दी गईं, वह भी खटारा हैं।
जिससे सफर करना मुश्किल भरा होता है। शाम पांच बजे के बाद मुख्यालय जाने के लिए बस नहीं है। माधौगढ़ में फायर ब्रिगेड स्थापना, कोल्ड स्टोरेज, रोडवेज स्टैंड न होने से लोगों परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। नेता चुनाव के दौरान कहते हैं अबकी बार जिताओ, फिर देखो विकास कैसे नहीं होत। जीतने के बाद वापस सुनने नहीं आते हैं।
माधौगढ़ क्षेत्र का सांसद न होने से विकास अटका
माधौगढ़। दुकानदार लक्ष्मीकांत सोनी का कहना है कि सांसद माधौगढ क्षेत्र से न होने पर माधौगढ़ का विकास अधर में लटका है। विकास के नाम पर नेता ऊपर तक पैरवी नहीं करते हैं। यही कारण है कि तहसील में मुंसिफ मजिस्ट्रेट की नियुक्ति, तहसील के बगल में पड़ा फायर ब्रिगेड स्थापना, महिला इंटर कालेज, रोडवेज बस स्टैंड, मिनी शुगर मिल, कोषागार, कोल्ड स्टोरेज आदि आज भी अधर में लटके है।
नेता सिर्फ बड़ी-बड़ी बातें करते हैं
माधौगढ़। व्यापारी अरविंद सिंह के मुताबिक नेता जब चुनाव के दौरान वोट लेने के लिए आते हैं। तब बड़ी-बड़ी बातें करते है। कहते हैं कि क्षेत्र के विकास के लिए सदैव तैयार रहेंगे, लेकिन जीतने के बाद बुलावे पर भी उद्घाटन तक में नहीं आते है। जनता अब नेताओं के झूठे वादों को समझने लगी है।
आशा है, जल्द होगा सुधार
माधौगढ़। नगर पंचायत अध्यक्ष राजकिशोर गुप्ता का कहना है कि तहसील माधौगढ़ पिछड़ी तहसील है। 40 प्रतिशत जनता आज भी बीहड़ क्षेत्र में निवास कर रही है। सरकार शीघ्र ही रोड, बिजली मुहैया करा रही है। सड़कों की दशा भी सुधर रही है। सभी चीजों में जल्द सुधार होगा।