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Jalaun News: पांच किस्तों में उमेश के खाते में डाले गए 5.43 लाख

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उरई। जनपद में सामने आए चिकित्सा प्रतिपूर्ति घोटाले में नया और चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जांच में पाया गया है कि उमेश नामक व्यक्ति के खाते में पांच अलग-अलग किस्तों में कुल 5,43,675 रुपये ट्रांसफर किए गए। खास बात यह है कि उमेश का संबंधित विभाग से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं है।
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जांच रिपोर्ट के अनुसार रकम को एकमुश्त भेजने के बजाय पांच बार में डाला गया, जिससे भुगतान सामान्य प्रक्रिया जैसा प्रतीत हो। इसी तरह संजीव के खाते में दो किस्तों में 6,65,169 रुपये, राजनारायण के खाते में 1,75,691 रुपये तथा हरिपाल गोली के खाते में 1,65,319 रुपये चिकित्सा प्रतिपूर्ति के नाम पर स्थानांतरित किए गए। कुल मिलाकर 15,49,854 रुपये की सरकारी धनराशि संदिग्ध परिस्थितियों में निकाली गई।

मामले की जानकारी होने पर जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय ने एडीएम संजय कुमार की अगुवाई में जांच टीम गठित की। प्राथमिक जांच में विभागीय कर्मचारियों की मिलीभगत से लाखों रुपये के गबन की पुष्टि हुई है। टीम अब भुगतान स्वीकृति की प्रक्रिया, संबंधित अभिलेखों और बैंक खातों की विस्तृत जांच कर रही है।
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जांच में यह भी सामने आया है कि मइयादीन के नाम पर चार बार चिकित्सा प्रतिपूर्ति की रकम निकाली गई, जबकि उन्हें इसकी जानकारी तक नहीं थी। कैलाशी देवी के नाम पर तीन बार भुगतान किया गया। शिवराम पाल और एक पूर्व भूमि संरक्षण अधिकारी के नाम पर भी एक-एक बार धनराशि जारी होने का मामला सामने आया है।

सूत्रों के मुताबिक कुछ सेवानिवृत्त कर्मचारियों के परिजनों को भी इस जाल में फंसाया गया। आरोप है कि निकाली गई रकम में से उन्हें हिस्सा देकर मामले को दबाने की कोशिश की जाती थी।

प्रकरण में लिपिक श्यामजी और हर्ष वर्मा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर पुलिस ने उनकी तलाश शुरू कर दी है। जांच आगे बढ़ने के साथ अन्य लोगों की भूमिका भी उजागर होने की आशंका जताई जा रही है।



विकास भवन स्थित एक कार्यालय में भी गड़बड़ी की आशंका

उरई। चिकित्सा प्रतिपूर्ति के मामले में जिले भर में खलबली मची हुई है। लोगों का कहना है कि विकास भवन स्थित एक कार्यालय में भी चिकित्सा प्रतिपूर्ति में गड़बड़ी की गई है। वहां तैनात लिपिक के द्वारा भी फर्जी निकासी करवाई गई है। इस पर भी टीम जांच करे तो सच्चाई सामने आ सकती है। (संवाद)





फर्जी चिकित्सा प्रतिपूर्ति पर सख्ती, एक सप्ताह में मांगी रिपोर्ट

उरई। जनपद में चिकित्सा प्रतिपूर्ति के नाम पर फर्जीवाड़े की शिकायतों के बाद जिला प्रशासन सख्त हो गया है। डीएम राजेश कुमार पांडेय ने सभी विभागाध्यक्षों और आहरण-वितरण अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति से संबंधित दावों की गहन जांच सुनिश्चित की जाए।

निर्देश में कहा गया है कि संज्ञान में आया है कि कुछ कर्मचारियों द्वारा चिकित्सा प्रतिपूर्ति मद से गलत आहरण कर सरकारी धनराशि प्राप्त की जा रही है जो गंभीर वित्तीय अनियमितता की श्रेणी में आता है। ऐसे मामलों को रोकने के लिए संबंधित विभाग पहले यह सुनिश्चित करें कि प्रस्तुत बिलों व दवाओं का विधिवत परीक्षण कराया गया है। परीक्षण के बाद ही भुगतान की कार्रवाई की जाए।

यह भी स्पष्ट किया गया है कि पूर्व में भुगतान किए गए चिकित्सा बिलों की भी जांच कर ली जाए, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि भुगतान में किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई है। साथ ही यह देखा जाए कि चिकित्सा प्रतिपूर्ति, भविष्य निधि अथवा अन्य मदों के भुगतान के लिए कर्मचारियों द्वारा स्वयं दावे प्रस्तुत किए गए हैं या नहीं और धनराशि उनके खाते में ही अंतरित हुई है।

जिलाधिकारी ने सभी कार्यालय अध्यक्षों से एक सप्ताह के भीतर प्रमाण-पत्र उपलब्ध कराने को कहा है कि उनके यहां इस प्रकार की कोई गड़बड़ी या अनियमितता नहीं पाई गई है। निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।
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