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साहित्यकार समाज की धरोहर हैं-प्रदीप

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उरई। साहित्यकार समाज की धरोहर है। साहित्यकार कवि हमेशा समाज के उत्थान के लिए चिंतन करते हैं। यह बात गुरुवार को माहिल तालाब स्थित कवि सम्मेलन व सम्मान समारोह में जनपद के छंद शास्त्री माया हरिश्याम पारथ का सम्मान करते हुए जय मातेश्वरी समिति के अध्यक्ष व सपा के प्रदेश सचिव प्रदीप दीक्षित ने कही।
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कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे यज्ञदत्त त्रिपाठी, बाबूराम कौशल, रघुराज स्वर्णकार, शिवराम दीक्षित, अवनीश चंद्र द्विवेदी, काशीप्रसाद वर्मा, रामप्रकाश द्विवेदी, डा.वाईके शर्मा, कैलाश पाठक आदि ने सरस्वती पूजन व दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की। मंजू तिवारी ने सरस्वती वंदना प्रस्तुत कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। बामौर (झांसी) से आए हरनाथ सिंह ने पढ़ा-जाति धर्म, भाषा, भाव, भेद धुले, रंग रंग मिट जाए मन के मलाल आज होली में। गुरसरायं से आए सुखदेव व्यास ने शहीदों को याद करते हुए सुनाया-तेरे बिन होली हुई बदरंग। रामगोपाल प्रजापति ने सुनाया-ग्वालिन होली में हुरयानी। सिद्धार्थ त्रिपाठी, दिनेश वैज्ञानिक, महेश शर्मा, रामादेवी शर्मा, महेश प्रजापति, श्यामबिहारी श्रीवास्तव, अभिषेक श्रीवास्तव, वीरेंद्र तिवारी, विनोद गौतम, मिश्रीलाल आर्य, रविशंकर मिश्रा, बागीश्वर द्विवेदी, विवेकानंद श्रीवास्तव आदि ने काव्य पाठ किया। संचालन महेंद्र पाटकार मृदुल ने किया। समिति के कोषाध्यक्ष बाबूराम कौशल ने सभी का आभार व्यक्त किया।
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