जालौन/रामपुरा। रामपुरा और जालौन के अलग-अलग स्थानों में चल रही भागवत कथा में भक्तों की बड़ी संख्या में भीड़ उमड़ रही है। जालौन के पुराना अस्पताल मैदान में चल रहे श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ सप्ताह के दूसरे दिन भागवताचार्य पुरुषोत्तम शरण महाराज ने कहा कि किसी भी स्थान पर बिना निमंत्रण जाने से पहले इस बात का ध्यान जरूर रखना चाहिए कि वहां आपका सम्मान होगा कि नहीं। यदि अपमान की आशंका हो तो कदापि नहीं जाना चाहिए। चाहे वह स्थान अपने जन्म दाता पिता का ही घर क्यों न हो।
उन्होंने भक्त ध्रुव द्वारा तपस्या कर श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा सुनाते हुए बताया कि भक्ति के लिए कोई उम्र बाधा नहीं है। भक्ति को बचपन में ही करने की प्रेरणा देनी चाहिए। क्योंकि बचपन कच्चे मिट्टी की तरह होता है उसे जैसा चाहे वैसा पात्र बनाया जा सकता है। इस दौरान परीक्षित रामश्री सोनी, अनिल सोनी, हरिशंकर सोनी, चंद्रप्रकाश सोनी आदि रहे।
वहीं रामपुरा के जवाहरनगर में चल रही कथा के अंतर्गत कथावाचक सतीश अवस्थी ने कहा कि मां ही बच्चे की प्रथम गुरू होती है। वह चाहे तो बच्चे मेें महापुरुषों से संस्कार भर सकती है। बताया कि जीवन में बैर विरोध तब तक रहता है जब तक जीव भगवान का नहीं है। जब जीव भगवान का हो जाता है तब सभी बैर और विरोध मिट जाते हैं। बिना राम की कृपा के सत्संग नहीं मिलता है। मनुष्य को स्वभाव से सीधा और सरल तो होना ही चाहिए लेकिन अधिक सीधा होना भी कभी-कभी हितकारी नहीं रहता है। इस मौके पर परीक्षित साधना-राजेश दिवेदी, सक्षम दिवेदी, मुन्ना दुबे, संतोष दुबे, विपिन चौबे, गौरव दुबे, आदि मौजूद रहे।