जागरूकता के अभाव में यातायात नियमों के प्रति अनदेखी लोगों की जान पर भारी
पड़ रही है। बीते 11 महीनों में हुए सड़क हादसों में दो सौ से ज्यादा लोग
असमय काल के गाल में समा चुके हैं जबकि आठ सौ से ज्यादा लोग अपंग हो गए।
इनमें अधिकांश मामलों में यातायात नियमों की अनदेखी कारण बनी। पिछले एक माह
में हुई दुर्घटनाओं में 21 लोगों को
जान से हाथ धोना पड़ा जबकि 129 लोग
अपंग हो गए। इसके बावजूद लोग न तो बाइक चलाते समय हेलमेट लगाते हैं और न ही
यातायात नियमों का पालन करना जरूरी समझते हैं। यही नहीं, जिले में कार
चलाते वक्त सीट बेल्ट बांधना भी लोग मुनासिब नहीं समझते। इससे अंदाजा
लगाया जा सकता है कि लोग अपनी जान के प्रति कितने लापरवाह हैं। वहीं,
परिजन
टीन एजर्स को बाइक थमा देते हैं और फिर ये हवा से बातें करते नजर आते हैं।
इसका परिणाम दुर्घटना के रूप में सामने आता है। बाइक से होने वाली अधिकांश
दुर्घटनाओं में मरने या फिर घायल होने वाले लोग युवा वर्ग से होते हैं।
पिछले 11 महीने के आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक 219 लोग जान गवां चुके
हैं और करीब 835 लोग अपंग हो गए। बावजूद इसके, पुलिस या यातायात पुलिस
लोगों को जागरूक करने की खानापूरी भर करती है। इस बार तो यातायात माह चुनाव
की भेट चढ़ गया है।
सीओ बोले, हेलमेट न लगाया ता होगी कार्रवाई
बढ़ते सड़क हादसों की बाबत सीओ जंगबहादुर सिंह ने कहा यातायात पुलिस
लगातार लोगों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक कर रही है। लोगों ने
हेलमेट लगाना शुरू भी कर दिया है। फिर भी वह स्कूलों, कॉलेजों में जाकर
बच्चों को यातायात नियमों के प्रति जागरूक कर रहे हैं। वाहनों में रेडियम
भी लगाया गया है जिससे रात में होने वाले हादसों में कमी आए। उन्होंने
बताया कि वह अभियान चलाकर यातायात नियमों की अनदेखी करने वालों के खिलाफ
कार्रवाई करेंगे।
यहां होते हैं अधिकतर हादसे
जालौन बंगरा मार्ग
जालौन का अकोढ़ी गांव व भिटारा गांव के पास
कालपी रोड स्थित चमारी नाला
झांसी रोड स्थित बड़ागांव मोड़
कालपी का बाईपास व चौरासी गुम्बद
इसलिए होते हैं हादसे
जानकारों
की मानें तो हाइवे पर हादसों की मुख्य वजह ओवर लोड मौरंग के ट्रकों से हुआ
बड़े-बड़े गड्ढे हैं। सड़क ध्वस्त हो चुकी है। इससे रफ्तार में आ रहे कार
या अन्य वाहन फिसल जाते है ओर हादसा हो जाता है।
डग्गामार वाहन भी बनते हैं दुर्घटनाओं का कारण
जिले के हर बस स्टैंड पर डग्गामार वाहनों की पौबारह है। लोग अपनी पैठ के
जरिए निजी वाहनों में सवारियां बैठाकर डग्गामारी करते हैं। कालपी बस
स्टैंड, जालौन रोड, झांसी बस स्टैंड, कोटरा व डकोर बस स्टैंड से डग्गामार
वाहनों का संचालन बिना रोक टोक किया जाता है। पुलिस व आरटीओ विभाग इन पर
कोई कार्रवाई नहीं करते। ये तेज गति से ट्रैफिक नियमों की धज्जियां उड़ाते
हुए वाहन चलाते हैं जिससे रोज कोई न कोई दुर्घटना होती है।
हाइवे से कुछ राहत भी
हाइवे निर्माण के बाद हादसों में कमी आई है। शहरियों की मानें तो जबसे शहर
में भारी वाहनों पर रोक लगी है तबसे हादसों में कमी आई है। शहर के अखिलेश
कुमार , अनिल यादव का कहना है कि जब तक लोगों पर कार्रवाई नहीं होगी तब तक
हादसे नहीं थमेंगे।
हेलमेट हो जरूरी
उरई। जाने माने सर्जन डा.
रमेश चंद्रा का कहना है कि उनके पास अधिकांश हादसे के शिकार लोग आते हैं।
इनमें ज्यादातर मामलों में सिर में चोट होती है। स्पष्ट है कि यहां के लोग
बाइक चलाते समय हेलमेट नहीं लगाते हैं। पुलिस को महानगरों की तर्ज पर बाइक
सवारों के लिए हेलमेट अनिवार्य कर देना चाहिए।
वर्जन
हेलमेट
लगाकर न चलने वालों पर कार्रवाई के बाबत सभी अधिकारियों को निर्देश दिए गए
हैं। जल्द ही बड़ा अभियान चलाकर हेलमेट न पहनने वालों पर सख्त कार्रवाई की
जाएगी। - एन कोलांचि, एसपी
नवंबर में हुईं प्रमुख सड़क दुर्घटनाएं
-3 नवंबर माधौगढ़ के गोपालपुरा के पास बाइक सवार तीन युवकों की मौत।
-10 नवंबर अजनारी रोड स्थित फ्लाई ओवर पर कार सवार ने युवक को रौंदा।
-13 नवंबर को पिरौना नहर में श्रृद्धालुओं से भरी ट्रैक्टर ट्राली पलटी, महिला की मौत।
-15 नवंबर को बालू लदा ट्रक पलटा, लुटेरे की मौत।
-17 नवंबर को जोल्हूपुर के पास ट्रक ने बाइक सवार युवक को रौंदा।
-22 नवंबर को ट्रक ने सिपाही को टक्कर मारी, हालत गंभीर।
-26 नवंबर को रामपुरा में स्कूली दो छात्राओं को रोंदा।
-27 नवंबर को बाइक नहर में गिरी, युवक की मौत।
-30 नवंबर को जालौन के भिटारा के पास बाइक सवार पिता पुत्र को रोडवेज ने रौंदा।