उरई। एसपी के निर्देश पर जनपद पुलिस द्वारा जुआ व शराब के खिलाफ चलाए गए अभियान में कोतवाली पुलिस, स्वाट व सर्विलांस टीम को तब बड़ी सफलता मिली जब उन्होंने छापा मारकर 21 जुआरियों को रंगे हाथों पकड़ा। जबकि कुछ जुआरी अफरातफरी के बीच मौके से भाग भी निकले। फड़ से पुलिस को सात लाख रुपये, मोबाइल व ताश की गड्डी भी मिली है। पूरे मामले का एसपी डॉ सतीश कुमार ने शुक्रवार को खुलासा किया।
शहर कोतवाली पुलिस, स्वाट व सर्विलांस टीम ने गुरुवार की देर रात शहर कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला राजेंद्र नगर में बाल भारती स्कूल के पास कृष्ण बिहारी उर्फ केके के मकान की तीसरी मंजिल पर छापा मारकर 21 जुआरियों को गिरफ्तार कर लिया। खुलासा करते हुए एसपी ने बताया कि फड़ से कृष्ण बिहारी उर्फ केके , उमेश, रमेश राजपूत, देव सिंह, आनंद तिवारी, भानुप्रताप, याद मोहम्मद, इरफान, राजेंद्र कुमार, जीतेंद्र, अख्तर, दुर्गेश गौतम, छत्रपाल सिंह, मोनू महाराज, दिलीप कुमार, रोहित, शैलेंद्र कुमार, हरिओम राजपूत, रामवीर सिंह, सुनील कुमार, धर्मेंद्र यादव को जुआ खेलते हुए पकड़ लिया।
जुए के फड़ से पुलिस को 6 लाख 50 हजार व तलाशी में 37280 रुपये व 22 मोबाइल व ताश की गड्डी बरामद हुई। पकड़े गए जुआरियों पर पुलिस ने मामला दर्ज कर जेल भेज दिया। आरोपियों पर जल्द ही गैंगस्टर की कार्रवाई भी की जाएगी। पुलिस टीम में एएसपी डॉ अवधेश सिंह, सीओ सिंटी संतोष कुमार, मनोज कुमार, रवि भदौरिया, कर्मवीर सिंह, बृजेंद्र सिंह, गौरव वाजपेई, पवन कुमार, जयकरन, विपिन सोनी, प्रमोद कुमार, भरत कुमार, राघवेंद्र सिंह आदि रहे। एसपी ने टीम को 25 हजार इनाम देने की बात भी कही है।
ग्रिल काटी, छत फांदकर घुसे सिपाही
एसपी ने बताया कि जुआ मकान की तीसरी मंजिल पर चल रहा था। जिस कारण उस पर छापा मारना थोड़ा कठिन था। इसके लिए खामोशी के साथ सिपाहियों को गेट पर लगी लोहे की ग्रिल काटनी पड़ी। इसके अलावा सिपाहियों को छत से भी कूदकर भी जुआरियों की घेराबंदी करनी पड़ी।
फड़ से केके की रोजाना की कमाई 20 हजार
पुलिस सूत्रों की मानें तो केके पिछले काफी समय से जुआ खिलाने का ही धंधा करता था। दीवाली के वक्त उसका धंधा और तेज हो जाता है। जुआरियों ने बताया कि प्रत्येक से 100 से 200 रुपये तक की नाल भी ली जाती थी। इस हिसाब से एक दिन में केके की कमाई करीब 20 हजार रुपये होती थी।
जुआरियों के लिए कोतवाली में लगा मेला
पुलिस जैसे ही जुआरियों को लेकर कोतवाली पहुंची, उन्हें छुड़ाने के लिए भी लोगों का पहुंचना शुरू हो गया। किसी जुआरी के लिए वकील तो किसी के लिए नेता के सिफारिशी फोन अधिकारियों के पास आने लगे। पूरी रात कोतवाली के बाहर लोगों की भीड़ लगी रही पर पुलिस ने किसी की एक नहीं सुनी।