उरई। प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद अभी भी जिले में दर्जनों गोशालाएं अधूरी पड़ी हैं, जो प्रशासन की अन्ना समस्या से निपटाने की तमाम तैयारियों पर पानी फेरती नजर आ रही हैं। स्थिति ये है कि एक तरफ जहां किसान अन्ना से परेशान होकर रतजगा करने को मजबूर है वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक उदासीनता की वजह से कई छोटी बड़ी गोशालाएं बंद पड़ी हैं।
इसके साथ ही कई क्षेत्रों में अभी भी अस्थायी गोशालाओं का निर्माण नहीं कराया जा सका। जिससे किसानों को अन्ना समस्या से जूझना पड़ रहा है, जबकि शासन के निर्देश थे कि दस जनवरी तक हर हाल में पंचायत स्तर पर गोशालाओं को चालू किया जाए, लेकिन फिर भी जिले में गोशालाएं बंद पड़ी हैं और किसान मजबूर है।
आटा क्षेत्र में अन्ना समस्या से परेशान किसानों के लिए आटा पावर हाउस के बगल में खाली पड़ी ग्राम सभा की जमीन पर करीब दो वर्ष पहले मनरेगा के बजट से स्थायी गोशाला का निर्माण कराया गया था। निर्माण के समय इसकी लागत 1.92 लाख रुपये आई थी। गोशाला बनने के बाद क्षेत्र के किसानों को अन्ना समस्या से काफी राहत मिली थी, लेकिन अनदेखी के चलते ये राहत सिर्फ कुछ दिनों की ही रही।
अधिकारियों की उदासीनता व खाने की कमी से यह गोशाला धीरे-धीरे बंद हो गई। एक तरफ जहां जिले में कई नई व पुरानी गोशालाओं को शुरू कराया गया वहीं आटा की गोशाला पर अभी भी ध्यान नहीं दिया जा रहा है। गांव के बबलू तिवारी, अजय पांडे, सौरभ तिवारी, वीरू तिवारी आदि का कहना है कि अगर गांव की ही गोशाला शुरू हो जाए तो यहां के किसानों को काफी राहत मिल सकती है।
डकोर ब्लाक के मुहम्मदाबाद क्षेत्र स्थित ऐरी रामपुरा, बंधौली, गुढ़ा, सिमिरिया, चिल्ली आदि गांवों में पिछले एक माह में कई बार अन्ना कहर बरपा कर सैकड़ों बीघा फसल चट कर चुके हैं। कई बार यहां के किसान अन्ना समस्या को लेकर सड़कों पर उतर चुके हैं, लेकिन इसके बावजूद किसानों को अन्ना समस्या से मुक्ति दिलाने के लिए प्रशासन ने कोई ठोस कदम नहीं उठाए।
स्थिति यह है कि कई बार फसल चट करने के बाद भी यहां एक भी अस्थायी गोशाला का निर्माण नहीं कराया गया। क्षेत्र के किसान शांति स्वरूप, बाबू शाह, देवेंद्र सिंह, चरन सिंह आदि का कहना है कि यहां पर करीब तीन से चार सैकड़ा अन्ना जानवर हैं, जो रोजाना किसी न किसी किसान के खेत को निशाना बनाकर फसल को नुकसान पहुंचा रहे है। अगर यहां के सभी ग्राम पंचायत में एक अस्थायी गोशाला बना दी जाए तो किसानों को कुछ हद तक अन्ना समस्या से मुक्ति मिल सकती है।