कालपी (जालौन)। तपते बुंदेलखंड में पानी संकट से जूझ रहे लोगों से अब जीवनदायी नदियां भी रूठती नजर आ रही हैं। बढ़ते तापमान के चलते दिनोंदिन नदियों का जलस्तर घटता जा रहा है। स्थिति यह है कि हाल के दिनों में यमुना का जलस्तर करीब पांच मीटर घट गया है। तीन किमी तक फैले यमुना का घाट पर अब पानी की जगह रेत ही रेत नजर आ रही है। जिससे यमुना की तलहटी में बसे गांवों में कुएं एवं हैंडपंप भी पानी देना बंद कर गए हैं। जिससे क्षेत्र के ग्रामीण पानी के संकट से जूझ रहे हैं। वहीं लगातार गिरते जलस्तर ने प्रशासन की भी नींद उड़ा रखी है।
बता दें कि जिले से निकली यमुना नदी न सिर्फ जिले की आस्था का केंद्र है बल्कि जीवनदायिनी भी है। जिले की पचनद सीमा से शुरू होकर कालपी की सीमा तक यह नदी क्षेत्र के विभिन्न ब्लाकों के लोगों के लिए पानी का मुख्य स्रोत है, लेकिन दिनों दिन बढ़ती तपिश व आसमान से बरस रही आग की वजह से यमुना का जलस्तर लगातार घटता जा रहा है। स्थिति यह है कि विशाल पाट में बहने वाली नदी महज कुछ मीटर के दायरे में सिकुड़ गई है। केंद्रीय जल आयोग कार्यालय से मिली जानकारी के अनुसार यमुना नदी का जलस्तर लगातार कम होता जा रहा है, जिससे यमुना की तलहटी में बसे गांवों में कुएं व हैंडपंपों का जलस्तर भी गिर गया है।
यमुना की तलहटी में बसे शेखपुर, गुढा, देवकली, हीरापुर, मदारपुर, मंगरौल, मैनूपुर, जीतामऊ सहित दर्जनों गांव में पेयजल की समस्या गहरा गई है। देवकली निवासी मानसिंह, तारा देवी, विनोद कुमार, सुनीता आदि ने बताया एक तो गांवों के अधिकांश हैंडपंप खराब है। ऐसे में कुओं का सहारा था, जो वह भी पिछले माह से सूख गए है। गांव के लोगों को पीने के पानी के लिए काफी दूर तक जाना पड़ता है। दिनोंदिन आसमान से बरसती आग की वजह से जिले की जीवनदायी नदी यमुना का जल स्तर लगातार गिरता जा रहा है। अधिकारियों की मानें तो शुक्रवार को जलस्तर 92 मीटर मापा गया है जो सामान्य से काफी कम है।
कहा कि गर्मियों में वैसे जलस्तर 99 से 102 मीटर तक रहता है। उनका कहना है कि अगर आंकड़े देखे जाएं तो पिछले दो दशक में यह यमुना का सबसे कम जलस्तर है। पिछले दो दशकों में कभी भी यमुना का जल स्तर 95 मीटर से नीचे नहीं गया। सन 2001 में सबसे कम जलस्तर करीब 96 रहा था। यह पहली बार है जब जल स्तर का आंकड़ा 96 के नीचे गया है। केंद्रीय जल आयोग कार्यालय प्रभारी ज्ञानचंद ने कहा कि मंगलवार को यमुना का जलस्तर 92 मीटर मापा गया है। सामान्य तौर पर यमुना का जलस्तर 99 व 102 मीटर रहता है। इस समय जलस्तर पांच मीटर नीचे चला गया है। अगर यही हाल रहा और समय रहते बारिश न शुरू हुई तो निश्चित रूप से यमुना नदी का जलस्तर और कम होने की संभावना है।