उरई (जालौन)। देश में चले मोदी मैजिक का असर जिले की तीनों विधानसभा में दिखाई दिया लेकिन संसदीय सीट से जुड़ी पड़ोसी कानपुर देहात के भोगनीपुर विधानसभा में मैजिक बेअसर रहा। जानकर हैरत होगी कि भोगनीपुर सीट पर गठबंधन ने भाजपा के पसीने छुड़ा दिए। यहां पर भाजपा प्रत्याशी एवं चार बार के सांसद रहे भानु प्रताप को गठबंधन के अजय पंकज से 2127 मत कम मिले। चुनावी जनसंपर्क के दौरान भी भानु प्रताप को भोगनीपुर के मतदाताओं से आशानुरूप सहयोग नहीं मिला था। मतदाताओं की मानें तो सांसद की क्षेत्र से दूरी ही नाराजगी का प्रमुख कारण रही है।
बता दें कि जालौन-भोगनीपुर-गरौठा संसदीय सीट पर जनपद की उरई, कालपी और माधौगढ़ के अलावा झांसी की गरौठा व कानपुर देहात की भोगनीपुर विधानसभा भी शामिल हैं। यूं तो इन सभी पांचों विधानसभाओं में भाजपा व गठबंधन के बीच कड़ा मुकाबला माना जा रहा था। राजनीतिक पंडित भी इस बार भाजपा की राह आसान नहीं मान रहे थे। अनुमान था कि मोदी मैजिक के बावजूद जालौन की सीट में गठबंधन भाजपा को कांटे की टक्कर देगा और हार-जीत का अंतर महज हजारों में होगा।
यही वजह थी कि गठबंधन के नेताओं ने भी मतदाताओं के बीच जाकर वादों के साथ खूब पसीना बहाया, लेकिन जनता ने इन सब को नकारते हुए भाजपा को प्रचंड जीत दिला दी। जितनी चौंकाने वाली भानु की चारों विधानसभाओं में शानदार जीत रही उतने ही चौंकाने वाले भोगनीपुर विधानसभा के परिणाम रहे। भोगनीपुर की जनता ने भाजपा को नकारते हुए जीत गठबंधन की झोली में डाल दी। भोगनीपुर विधानसभा के परिणाम पर नजर डालें तो भाजपा प्रत्याशी भानु प्रताप वर्मा को 93,580 वोट मिले जबकि गठबंधन प्रत्याशी अजय सिंह पंकज को 95,707 वोट मिले। भोगनीपुर में भानु को 2127 वोट कम मिले।
काम न आईं योगी और राजनाथ की सभाएं
भोगनीपुर विधानसभा में पार्टी की कमजोरी को भी शायद भाजपाइयों ने पहले ही भांप लिया था। यही वजह थी कि भोगनीपुर विधानसभा में प्रचार के दौरान सूबे के मुखिया योगी आदित्यनाथ तो कालपी विधानसभा क्षेत्र में केंद्रीय गृह राज्यमंत्री राजनाथ सिंह ने भी चुनावी जनसभाएं कर समर्थन जुटाने का प्रयास किया था लेकिन दो-दो दिग्गज नेताओं का प्रयास भी इस विधानसभा में पार्टी प्रत्याशी को गठबंधन के प्रत्याशी से आगे नहीं ले जा सका।