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अपने बलबूते उपलब्ध कराते हैं गरीबों को भोजन

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कोंच। कहते है कि अगर दिल में समाजसेवा का जज्बा हो तो कोई भी कार्य असंभव नहीं है। ऐसा ही कुछ कोंच के समाजसेवियों ने कर दिखाया है। वे एक समाजसेवी संस्था बनाकर न सिर्फ गरीबों को दो वक्त का भोजन उपलब्ध करा रहे हैं बल्कि परिवार के किसी सदस्य का जन्मदिन, माता पिता की बरसी या शादी की सालगिरह गरीबों के बीच मनाने की एक नई रीति शुरू की है, जो आज जिले में परंपरा सी बन गई है। संस्था बीमारी की स्थिति में गरीबों को नि:शुल्क चिकित्सक सुविधा और दवाएं भी उपलब्ध कराती है।
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तकरीबन दस साल पहले नगर के कुछ समाजसेवियों ने एक समिति का गठन दरिद्र नारायण सेवा समिति के नाम से किया था, समिति का मकसद था कि नगर के ऐसे लोगों जिनकी आजीविका का कोई साधन नहीं है, उनको भोजन दो वक्त का भोजन कराया जाए। नगर पालिका के रिटायर्ड कर्मचारी कढोरेलाल यादव को संयोजक बना कर इस समिति ने काम को आगे बढ़ाया और रेलवे भर्ती बोर्ड के अवकाश प्राप्त चेयरमैन प्रेम नारायण वर्मा ने शुरूआती निवेश के तौर पर अपने दिवंगत पिता छेदीलाल ठेकेदार की पुण्य तिथि 10 दिसंबर 2008 को निराश्रितों, विकलांगों और गरीबों के लिए दस दिन की भोजन व्यवस्था का प्रबंध किया और श्रीधर्मादा रक्षिणी सभा द्वारा संचालित बल्दाऊ धर्मशाला में गरीबों के लिए भोजन की पांत होने लगी।

बस फिर क्या था, नगर के सैकड़ों हाथ इन गरीबों को भोजन कराने के लिए आगे बढ़ते गए, कोई अपने किसी प्रियजन की पुण्यतिथि तो कोई अपनी शादी की सालगिरह या बच्चों के जन्मदिन इन्हीं गरीबों के बीच आकर मनाने लगे, जिससे उन्हें आत्मिक शांति मिलती और गरीबों का पेट भरने लगा। आज इस समिति को दस साल हो गए और अपनी अब तक की इस यात्रा में वह रोजाना गरीबों को भोजन कराती आ रही है। खास बात यह है कि जो गरीब दिव्यांग हैं और चलकर समिति के भवन तक नहीं पहुंच सकते हैं उनके घरों पर टिफिन में भरकर भोजन भेजा जाता है। समिति यह सारी व्यवस्थाएं अपने संसाधनों से करती है। जिस किसी को पुण्य लाभ अर्जित करना होता है वह एक निर्धारित शुल्क बतौर समिति को दान कर रसीद प्राप्त करता है और समिति उसके नाम से उस दिन का भोजन गरीबों को कराती है।
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लोग मिलते गए और कारवां बढ़ता गया
नगर के कढोरेलाल यादव जिन्हें प्यार से लोग बाबूजी कह कर बुलाते हैं। बाबू जी नगर पालिका में बतौर कैशियर सेवाएं देने के बाद जब 2005 में सेवानिवृत्त हुए। इसके बाद उन्होंने समाजसेवा का मन बनाया और सबसे पहले नगर में संपन्न लोगों के सामने हाथ फैला कर पुराने कपड़े एकत्रित किए और चीथड़ों में बसर करने वाले गरीबों के तन ढकने का काम किया। इसके बाद समाज के अन्य लोग उनके साथ जुड़ते चले गए और कारवां बनता गया। आज कई अधिकारी व अन्य वर्ग के लोग संस्था से जुडे़ है।

जल्द होगा संस्था का भवन, दान में मिली जगह
निजी भवन के लिए महंत ब्रजभूषण दास एडवोकेट ने समिति को गांधीनगर इलाके में 55 डेसीमल भूमि दान कर दी है और समिति के संयोजक कढोरेलाल यादव, सेवानिवृत्त प्राचार्य प्रो. वीरेंद्र सिंह, सेवानिवृत्त शिक्षक देवेंद्र द्विवेदी, प्रतापनारायण तिवारी लल्ला-रामराजा निरंजन, और समाजसेवी हाजी सेठ नसरुल्ला ने इस वृद्धाश्रम की स्थापना के लिए शुरुआती योगदान में अपने परिजनों की स्मृति में एक एक कमरे का निर्माण करा कर वृद्घाश्रम की स्थापना का मार्ग प्रशस्त कर दिया है।

बच्चों को पढ़ाने के लिए बन रही योजना
संस्था अपने खर्चे पर अनाथ बच्चों को पढ़ाने लिखाने की योजना भी बना रही है। इसकी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। जल्द इसके लिए क्षेत्र में सर्वे कर ऐसे बच्चों का चयन किया जाएगा, जो पैसे के अभाव में शिक्षा ग्रहण नहीं कर पा रहे। उन बच्चों को संस्था गोद लेकर उनकी पढ़ाई लिखाई का खर्च वहन करेंगी।
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